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आखिर क्यों मनाया जाता है इस बुरे दिन को गुड़ फ्राईडे के रूप में, जानकर आप भी हो जाएंगें हैरान

ईसाई धर्म के लोग गुड फ्राइडे का त्यौहार धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन देश भर में सरकारी अवकाश भी रहता है। वैसे तो गुड फ्राइडे का नाम से कोई अच्छे दिनों का त्यौहार लगता है, लेकिन ऐसा नही है वास्तव में इसे शोक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस साल गुड फ्राइडे 7 अप्रैल को मनाया गया है। आपको बता दें कि यहूदी शासकों ने ईसाईयों के धर्म गुरू ईसा मसीह को तमाम शारीरिक और मानसिक यातनाएं देने के बाद शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ाया था। तब से ईसा मसीह की इस कुर्बानी के लिए ईसाई धर्म के लोग इस दिन को ‘गुड फ्राइडे’ के रूप में मनाते हैं। गुड फ्राइडे को होली डे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे जैसे नामों से भी लोग जानते है।

आखिर क्यों मनाते हैं गुड फ्राइडे

ईसाईयों के धर्म ग्रंथ बाईबल के अनुसार मानव जाति के कल्याण के लिए इस दिन ईसासियों के प्रभू और प्रेम, ज्ञान और अहिंसा का संदेश देने वाले ईसा मसीह ने बलिदान दे दिया था। बाइबल में बताया गया है कि लगभग 6 घंटे तक ईसा मसीह को कीलों से ठोक कर उन्हें लटकाया गया था। मान्यता है कि जब यह सब कुछ हो रहा तो आखिरी के 3 घंटे पूरे राज्य में अंधेरा छा गया और यीशु भगवान के प्राण त्यागने के बाद कब्रे अपने आप टूटने लगी थी। मान्यताएं ऐसी भी हैं कि सूली पर चढ़ाने के तीन दिन बाद ईसा मसीह पुन: जीवत हो गए थे। और वो दिन था रविवार का। इसके बाद पूरी दुनिया में उसे ईस्टर संडे के रूप में भी मनाया जाता है। 

क्या है इस दिन का महत्व

बता दें ईसाई धर्म के लोग 40 दिन तक उपवास रखते हैं, या फिर कुछ लोग सिर्फ शुक्रवार को उपवास रखते हैं, जिसे लेंट कहा जाता है। इस दिन लोग काले कपड़े पहनते हैं और चर्च व घरों में रखी सजावट की वस्तुओं को काले कपड़े से ढक देते हैं।

इस दिन लोग प्रभु यीशु से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और ईसा मसीह के अंतिम सात वाक्यों की विशेष व्याख्या करते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस दिन प्रभु यीशु के बलिदान को लोग सभी के साथ मिलकर चर्च में याद करते हैं।