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भावनाओं और सामाजिक मर्यादा के बीच का द्वंद्व हुआ प्रदर्शित

भारत भवन में हुआ नाटक माई री मैं का से कहूं का मंचन

भोपाल। भारत भवन में आयोजित चार दिवसीय रंगमहिमा नाट्य समारोह में रविवार को नाटक ‘माई री मैं का से कहूं का मंचन हुआ। यह प्रस्तुति दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कलाकरो ने दी। लेखक विजयदान देथा द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन अजय कुमार ने किया। नाटक का सेट लकड़ी के प्लेटफार्म पर बना था, जिसमें लोक शैली की आर्ट की झलक दिखाई गई थी।

प्ले में ग्र्रामीण परंपरा और उनके रंग-ढ़ंग को कलरफुल लाइट्स के साथ प्रस्तुत किया। वहीं लाइव संगीत में प्राचीन भारतीय वाद्ययंत्रों और राजस्थानी, छत्तीसगढिय़ा और बिहारी लोकगीतों ने दर्शकों को रोमांचित किया। रंगमहिमा समारोह के दूसरे दिन ‘रंगमंच की समकालीनता और उसके स्वप्न विषय पर वैचारिक सत्र का आयोजन भी किया गया।

पुरुष प्रधान विचारों से तोलना पड़ता है, अपने अधिकारों के लिए आज भी स्वतंत्र नहीं है स्त्री
नाटक ‘दुविधा कहानी का नाटकीय रुपांतरण हैै। इसमें महिलाओं की इच्छा, उसकी भावनाओं और सामाजिक मर्यादा के बीच के द्वंद्व को दिखाया गया है। हमारा प्रगतिशील समाज महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलकर चलने और समान अधिकार प्रदान करने की बात करता है, लेकिन सबसे बड़ी विषमता या विडम्बना को लेखक ने प्रस्तुत किया है। समाज में स्त्री आज भी अपने अधिकारों के के लिए स्वतन्त्र नहीं है। बल्कि उसे अपनी हर इच्छा-अनिच्छा को पुरुष प्रधान विचारों से तोलना पड़ता है।

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