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आयुर्वेद इलाज के नाम पर वृद्धा और उसके बैंक मैनेजर बेटे से 44 लाख की ठगी

भोपाल। शाहपुरा निवासी एक महिला को चलने में दिक्कत थी, राजस्थान के जालसाज गिरोह के सदस्य ने महिला के परिजनों को आर्युेवेदिक इलाज के लिए मना लिया। इसके बाद धोखाधड़ी करते हुए उनसे 44 लाख रुपए की ठगी कर ली। क्राइम ब्रांच ने राजस्थान से इस गिरोह के सदस्य को गिर तार कर लिया है। इस गिरोह के सदस्य दोनों राज्यों में वारदात को अंजाम देते थे। वे बड़े-बड़े होटलो में उन लोगों पर नजर रखते थे जिनको चलने-फिरने में दिक्कत रहती है।

क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के अनुसार शाहपुरा निवासी राकेश मोहन विरमानी ने लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि मेरी मां को पैरों में तकलीफ थी जिसका इलाज मैंने वैद्य से कराया है जिससे काफी आराम है, वैद्य और उसका एक साथी पीडि़त के घर पहुंचे और बताया कि इनके पैर जहर फैल गया है जिसे यंत्र के माध्यम से बाहर निकालना पड़ेगा। लगभग 300-400 जगह से यह प्रक्रिया करनी पड़ेगी ।

एक बार का चार्ज 6 हजार रुपये बताया गया, चंूकि पीडि़त को समस्या काफी थी जिस कारण उनके द्वारा इस प्रक्रिया से इलाज कराने हेतु सहमति दे दी गई। जिसके बाद गैंग का सदस्य जो वैद्य बनकर आया था उसने पीडि़त महिला के पैरो में फनलनुमा यंत्र के माध्यम से मवाद जैसी चीज निकाली जो सफेद द्रव्य पदार्थ जैसा दिख रहा था उसे जहर बताया।

मवाद बाहर निकलने से पीडि़त महिला को आराम लग गया। इस तरह उनके द्वारा लगभग 400 बार यह प्रक्रिया करायी गई। इसके लिए कुछ पैसे पीडि़त के द्वारा घर पर दिये गये शेष पैसे 21 लाख रुपये अपने बैंक से वैद्य के सहायक को ले जाकर बैंक से गैंग के सदस्यों के खातों में आरटीजीएस किये गये। क्राइम ब्रांच ने शिकायत की जांच शुरू की।

राजस्थान से हुई गिरफ्तारी

विवेचना के दौरान क्राइम ब्रांच की टीम राजस्थाने के जोधपुर पहुंची तथा बैंक खाताधारक विशाल की तलाश शुरू की गई। इसी दौरान अन्य सावर लाल नाम का अन्य खाताधारक क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी के पास से दो चैक बुक, आधार कार्ड व मोबाइल बरामद किया गया। उसने बताया कि उनका गैंग है जिसमे करीब 6-7 लोग है ।

वह तथा उसके दो-तीन साथी जोधपुर में रहते है । शेष सदस्य भोपाल आकर आउटर क्षेत्र में निवास करते है तथा दिन एवं शाम के समय बड़े होटल एवं रेस्टोरेंट के पास जाकर बुजुर्ग एवं ऐसी महिलाये जिनको चलने में दिक्कत होती है। गैैंग के वैद्य के द्वारा आयुर्वेदिक दवाओं के लिये पीडि़त को संजीवनी आयुर्वेदिक भंडार नई दिल्ली का पता दिया गया एवं दवा कोरियर के माध्यम से मंगाने हेतु बताया गया आरोपी द्वारा जो नंबर संजीवनी आयुर्वेद भंडार का बताया गया था वह राजस्थान का था जिस पर काल करने पर भी गैंग के सदस्यों द्वारा नकली दवायें पीडि़त को राजस्थान से कोरियर की गई जिसके बदले में लगभग 10 लाख रुपये खातों में जमा करवाये गये है ।

इस तरह गैंग के सदस्य के द्वारा इलाज के नाम पर धोखाधड़ी की घटना को अंजाम दिया गया ।

Fraud of 44 lakhs from old woman and her bank manager son in the name of Ayurveda treatment

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