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भारतीय वास्तुकला और अत्याधुनिक तकनीक का संगम है नई संसद, यहां पढ़िए इससे जुड़ी पूरी जानकारी

भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों और कला को समेटते हुए आधुनिक तकनीक का संगम बना नया संसद भवन दुनिया में अपनी पहचान छोड़ने में कामयाब होगा। इसमें मिलने वाली सुविधाएं दुनिया के कई देशों के विधान भवनों में उपलब्ध तक नहीं होगा। पर्यावरण के साथ इससे बेहतर तालमेल दुनिया के शायद ही किसी देशों के विधान मंडल की भवनों में देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह नया संसद भवन 28 मई को देश को समर्पित करेंगे। इसी दिन वीर सावरकर की जयंती भी है। आइए आपको बताते हैं इस नए सासंद भवन की पूरी जानकारी..
नए संसद भवन के अंदर इस्तेमाल की गई स्थापत्य कला सेंट्रल विस्टा में इस्तेमाल होने वाले कला के अनुरूप रखा गया है। नए भवन में लोकसभा का कक्ष राष्ट्रीय पक्षी मोर की तरह तैयार किया गया है। लोकसभा की गुबंद में यह स्पष्ट दिखाई पड़ेगा। जबकि राज्यसभा कक्ष राष्ट्रीय पुष्प कमल की तरह बनाया गया है। राज्यसभा की गुबंद अंदर से देखने पर बिलकुल कमल की पुष्प की तरह दिखेगा।
पूरी तरह से पेपरलेस होगा
नया संसद भवन पूरी तरह से पेपर लेस होगा। सांसदों को सदन में काम काज करने के लिए प्रत्येक सीट के साथ डिसप्ले बोर्ड लगा मिलेगा। यह एक मिनी कंप्यूटर की तरह होगा। जो संसद के इंट्रानेट से जुड़ा होगा। संसद में चलने वाली सारी कार्यवाही इस डिसप्ले बोर्ड पर दिखाई देगी। यह डिजिटल बोर्ड टच स्क्रीन वाला होगा। इतना ही नहीं गलियारों, लॉंज इत्यादि कई जगहों पर डिसप्ले बोर्ड लगा मिलेगा। जिसमें संसदीय कार्यवाही, समिति की बैठकों जैसे काम काजों की जानकारियां आती रहेंगी।


सांसदों को अलग से बैठने के लिए मिलेगा लॉंज
सांसदों को बैठने के लिए पुराने संसद भवन की तरह केंद्रीय कक्ष नहीं मिलेगा। नए संसद भवन में केंद्रीय कक्ष नहीं बनाया गया है। नए संसद भवन सांसदों को बैठने के लिए अत्याधुनिक सुविधायुक्त लॉंज मिलेगा। इसमें बैठकर वह आपस में बातचीत या अपने कामकाज निपटा सकते हैं।
बैठकों के लिए बनाई गई छह समिति कक्ष
नए संसद भवन में समितियों की बैठक के लिए छह कक्ष बनाए गए है। प्रत्येक कक्ष अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें भी सभी सीटों के साथ डिस्प्ले बोर्ड लगा रहेगा। ताकि बैठक के दौरान संबंधित जानकारियों के लिए संसद सदस्यों को परेशानी न हो। जबकि पुराने संसद भवन में समितियों की बैठक के लिए केवल तीन कक्ष हैं। इस कक्ष में अत्याधुनिक तकनीक सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।


सदन में आराम से बैठ सकेंगे सांसद
मौजूदा समय में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को संसदीय कार्यवाही के दौरान आपस में चिपक—चिपक कर बैठने की नौबत आ जाती है। सभी सांसदों की उपस्थिति के दौरान का दृश्य बड़ा ही विदारक पूर्ण लगता है। सांसदों को बैठने और बाहर निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसका प्रमुख कारण जगह की कमी है। पुराने संसद भवन में लोकसभा और राज्यसभा की अगली सीट पर दो लोगों को बैठने की व्यवस्था है। इसके पीछे क्रमानुसार सभी सीटों पर यह संख्या बढ़ती चली जाती है। ऐसे में सबसे पीछे की एक बेंच पर सीट पर बैठे लोगों की संख्या दहाई आंकड़ों में पहुंच जाती है। इसमें बीच में बैठे सांसदों को जब बाहर निकलना पड़ता तो उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। नए संसद भवन में सांसदों को इन बातों से निजात मिल जाएगा। नए संसद भवन में दो—दो लोग को एक साथ बैठने की सीट बनाई गई है। एक बेंच पर आगे से लेकर पीछे तक केवल दो ही सांसद बैठेंगे। इससे उन्हें बैठने से लेकर बाहर निकलने तक में कोई दिक्कत नहीं होगी।


नए भवन में होगा संविधान कक्ष
संसद के नए भवन में एक संविधान कक्ष भी बनाया गया है। इस संविधान कक्ष में देश के सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा सदस्यों के लिए पुस्तकालय, डाइनिंग रूम और पार्किंग की भी व्यवस्था रहेगी।
पावर बैक अप से सुसज्जित रहेगा नया भवन
नए भवन में बिजली जाने की समस्या नहीं रहेगी। पूरे भवन में सौ फीसदी यूपीएस पावर बैक अप रहेगा। इतना ही नहीं बारिश का पानी भी बर्बाद होने से बचाने का प्रावधान नए संसद भवन में किया गया है। इसके लिए रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम और वाटर रिसाइकलिंग सिस्टम भी लगाया गया है।
क्यों जरूरत पड़ी नए भवन की
नए भवन का निर्माण कार्य 10 दिसंबर 2020 को शुरू किया गया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी थी। वहीं संसद की पुरानी बिल्डिंग 1927 में बनकर तैयार हुई थी और तकरीबन 100 साल पुरानी हो चुकी है। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, नई जरूरतों को देखते हुए पुरानी बिल्डिंग अब उपयुक्त नहीं रह गई थी क्योंकि जगह कम होने के चलते सांसदों को न सिर्फ बैठने में दिक्कत हो रही थी बल्कि पुरानी इमारत में आधुनिक सुविधाओं और तकनीक का अभाव भी साफ नजर आने लगा था। इतना ही नहीं बार—बार छत से पानी का रिसाव और सदन के अंदर दुर्गंध का सामना सदस्यों को करना पड़ता था।
कितने लोग बैठ सकेंगे?
पुराने संसद भवन की तरह ही नए इमारत में भी लोकसभा और राज्यसभा के लिए दो अलग-अलग चेंबर होंगे। लोकसभा चेंबर में जहां एक साथ 888 सदस्य सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की गई है। वहीं राज्यसभा के चेंबर में एक साथ 384 सदस्य बैठ सकेंगे। पुरानी बिल्डिंग में संयुक्त सत्र का आयोजन सेंट्रल हॉल में किया जाता था, लेकिन नए इमारत में इसका आयोजन लोकसभा चेंबर में किया जाएगा, जिसमें जरूरत पड़ने पर एक साथ 1280 सांसद बैठ सकेंगे। भारत में अभी लोकसभा में 543 और राज्यसभा में 245 सीटें हैं।
लोकसभा गैलरी में मीडिया के लिए 140 सीट निर्धारित
नए संसद भवन में मीडिया के लिए दो गैलरी उपलब्ध कराई गई है। इसमें प्रत्येक गैलरी में 70—70 मीडियाकर्मी बैठ सकते हैं। प्रत्येक सीट के साथ लिखने के लिए आसानी से मुड़ने वाले फोल्डिंग डेस्क लगाया गया है। जबकि पुराने संसद भवन में मीडिया के लिए केवल एक गैलरी थी। इसमें 99 सीटें उपलब्ध थी। इतना ही नहीं पुराने भवन में मीडियाकर्मी को लिखने के लिए आगे के दो कतार को छोड़ कोई सहायक डेस्क नहीं होता है।
पुराने से बड़ा है नया संसद भवन
नया संसद भवन पुरानी बिल्डिंग से 17,000 वर्ग मीटर बड़ा है। पुराना संसद भवन 47,500 वर्गमीटर में है, जबकि नया भवन 64,500 वर्गमीटर में बनी है। वास्तुकार बिमल पटेल द्वारा बनाए गए नए भवन में 3 दरवाजे हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार के नाम से जाना जाएगा। इसमें सांसदों और वीआईपी के लिए अलग प्रवेश द्वार है। इस पर भूकंप का असर नहीं होगा।
पुराने भवन का इतिहास
संसद भवन का निर्माण 1921—1927 के दौरान किया गया था। संसद भवन नई दिल्ली की बहुत ही शानदार भवनों में से एक है। यह विश्व के किसी भी देश में विद्यमान वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इसकी तुलना विश्व के सर्वोत्तम विधान-भवनों के साथ की जाती है। यह एक विशाल वृत्ताकार भवन है। जिसका व्यास 560 फुट तथा जिसका घेरा 533 मीटर है। यह लगभग छह एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। भवन के 12 दरवाजे हैं, जिनमें से पाँच के सामने द्वार मंडप बने हुए हैं। पहली मंजिल पर खुला बरामदा हल्के पीले रंग के 144 चित्ताकर्षक खंभों की कतार से सुसज्जित हैं। जिनकी प्रत्येक की ऊँचाई 27 फुट है। भले ही इसका डिजाइन विदेशी वास्तुकार ने बनाया था किंतु इस भवन का निर्माण भारतीय सामग्री से तथा भारतीय श्रमिकों द्वारा किया गया था। तभी उसकी वास्तुकला पर भारतीय परंपराओं की गहरी छाप है।

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