Home » दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री पार्क जिन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री पार्क जिन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

  • दक्षिण कोरिया क विदेश मंत्री दो दिवसीय भारत दौरे परहै। इस दौरान उन्होंने भारत के विदेश मंत्री से कई अहम मुद्दों पर चर्चा की ।
  • राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ये उनका भारत का दूसरा दौरा है।
    नई दिल्ली ।
    दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री पार्क जिन ने शनिवार को राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री पार्क जिन ने राजघाट पर आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। दरअसल, पार्क दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। राजघाट पर पहुंचने के बाद पार्क जिन ने कहा, “मैंने 27 साल पहले भारत का दौरा किया था, वह मेरी पहली भारत यात्रा थी। मैं हमेशा उनकी (महात्मा गांधी) सत्याग्रह की उद्देश्यों की सराहना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि हम भारत के साथ मिलकर कूटनीतिक योगदान दे सकते हैं, जो (भारत) कोरिया का विशेष रणनीतिक साझेदार है।“
    कई रणनीतिक भागीदारी पर हुई चर्चा
    अपने भारत दौरे के पहले दिन साउथ कोरिया के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच कई राणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच खासतौर से व्यापार और रक्षा क्षेत्र में विशेष रणनीतिक भागीदारी को आगे ले जाने के लिए व्यापक चर्चा हुई। दोनों विदेश विदेश मंत्रियों ने यूक्रेन संघर्ष और हिंद-प्रशांत की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया।
    हिंदी में बोलकर पार्क ने किया हैरान
    पार्क जिन ने भारत में उनके मेहमाननवाजी के अनुभव को साझा किया, जिसने सबको हैरान कर दिया। दरअसल, उन्होंने अपनी बातें हिन्दी में बोली। उन्होंने कहा, “मुझे भारत आ कर बहुत खुशी हो रही है। मेहमानवाजी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। यह भारत के लिए बहुत ही अच्छा समय है। भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी इकोनोमी बन गई है।“
    भारत-दक्षिण कोरिया के कूटनीतिक संबंध के 50 वर्ष पूरे
    भारत व कोरिया के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए 50 साल हो चुके हैं। पार्क ने इस वर्षगांठ को काफी खास बताया और भारत के साथ आगे काम करने की इच्छा जताई। भारत और कोरिया के बीच बहुत सारी समानताओं का उल्लेख करते हुए पार्क जिन ने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांतिपूर्ण व स्थिर बनाने में भी अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं।