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विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को मंजूरी, अब देश में 2150 लाख टन तक हो सकेगा अनाज भंडारण

केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी मंजूरी प्रदान की है। सरकार की इस योजना से सहकारिता क्षेत्र में 700 लाख टन अन्न का भंडारण हो सकेगा। सरकार ने अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) के गठन और सशक्तिकरण की भी मंजूरी प्रदान कर दी है। इसमें सहकारिता मंत्री के अलावा कृषि और किसान कल्‍याण मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री और संबंधित मंत्रालयों के सचिव को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि इस योजना के तहत पैक्स और प्रखंड स्तर पर अनाज भंडारण के लिए गोदामों का निर्माण कराया जाएगा। हर प्रखंड में 2000 टन का गोदाम बनवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में भंडारण क्षमता बढ़ाकर 2,150 लाख टन की जाएगी। इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के बेसिस पर पहले 10 जिलों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना में पैक्स के स्‍तर पर भंडारण गृह, कस्‍टम हायरिंग सेंटर, प्रसंस्करण इकाई आदि स्थापित किए जाएंगे। इससे पैक्स को बहुउद्देशीय बनाया जा सकेगा। इस निर्माण से खाद्यान्न की बर्बादी में कमी आएगी, देश की खाद्य सुरक्षा सशक्त होगी और किसानों को अपनी फसलों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में सालाना करीब 3,100 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन होता है, जिसमें से मात्र 47 प्रतिशत अनाज का भंडारण किया जा सकता है। यानी 1450 लाख टन ही अनाज का भंडारण किया जाता है। भंडारण क्षमता में कमी की वजह से किसानों को या तो कम कीमत पर अपने अनाज बेचने पड़ते हैं या फिर अनाज खराब और बर्बाद हो जाता है। इससे किसानों को काफी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे है। इसी दिशा में उन्होंने अनाज भंडारण क्षमता को बढ़ाने का निर्णय लिया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र द्वारा 700 लाख टन अनाज भंडारण किया जाएगा। इसमें एक लाख करोड़ रुपए खर्च आएंगे। इस योजना का किसानों को काफी लाभ मिलेगा। इससे खाद्यान्न की बर्बादी कम होगी और देश में खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। किसानों को विभिन्न विकल्प प्रदान करके फसलों की बहुत कम मूल्य पर आकस्मिक बिक्री रुकेगी और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इससे खरीद केन्द्रों तक और फिर वेयरहाउस से उचित दर दुकानों तक खाद्यान्नों के परिवहन में होने वाले व्यय में भारी कमी आएगी। इतना ही नहीं खाद्यान्न के निर्यात में भी बढ़ोतरी होगी।
सबसे अधिक अन्न भंडारण क्षमता वाला राज्य है मध्यप्रदेश
मौजूदा समय में देश में कुल 47 फीसदी ही अनाज का भंडारण करने की क्षमता है। इससे सबसे अधिक अन्न भंडारण क्षमता वाला राज्य मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश में 75 प्रतिशत अन्न भंडारण की क्षमता है। दूसरे स्थान पर हरियाणा है। जहां 64 फीसदी अनाजों का भंडारण हो पाता है। इसके बाद पंजाब का नंबर आता है। जहां 60 फीसदी अन्न भंडारण की क्षमता है। राजस्थान में 25 फीसदी अन्न भंडारण की क्षमता है।
स्मार्ट सिटी के लिए 18 शहरों का होगा चयन
देश में स्मार्ट सिटी बनाने की प्रक्रिया का दूसरा चरण आरंभ करने की मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रदान कर दी है। इस योजना के तहत 18 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चयनित किया जाएगा। देश को 6 जोन में बांटकर इसमें से शहरों का चयन किया जाएगा। केंद्र सरकार इसके लिए 1866 करोड़ रूपए खर्च करेगी। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए होने वाले खर्च का 80 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी और बाकी के बचे 20 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार या स्थानीय निकाय वहन करेगी।

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