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विश्व जल दिवस: प्रयास भागीरथ जितने बड़े हों तो लक्ष्य पाना आसान : मोदी

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  • प्रधानमंत्री ने दिलाया वर्षा जल संग्रहण का संकल्प
  • मप्र-उप्र की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए हुआ अनुबंध

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

विश्व जल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेनÓ अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने देशभर क ी ग्राम सभाओं को वर्षाजनित जल के संग्रह का संकल्प दिलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयास भागीरथ जैसे बड़े हों तो लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है। इस अभियान से उन्होंने माताओं, बहनों को जोडऩे व इन्हें आगे रखकर कार्य करने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधियों से चर्चा भी की।

श्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता, महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्राणी मात्र के लिए पानी की अनिवार्यता किसी से छिपी नहीं है। भारत जैसे-जैसे विकास के पथ पर बढ़ रहा है, जलसंकट की चुनौती उतनी ही बढ़ती जा रही है। अगर अभी सतर्क नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी के लिए यह संकट और भयावह होगा। ये हमारा दायित्व है कि आने वाली पीढिय़ों के लिए अभी से अपनी जिम्मेदारी निभाए। बारिश के जल का संग्रहण सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। बीते 6 साल में इस दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना,हर खेत को पानी अभियान हो ‘पर ड्राप मोर क्रापÓ, नमामि गंगे मिशन, जल जीवन मिशन व अटल भूजल योजना इसकी बानगियां हैं। इन सभी पर तेजी से काम हो रहा है। श्री मोदी ने कहा कि जल जीवन मिशन में हर घर में नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। डेढ़ साल पहले देश के 19 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से सिर्फ तीन करोड़ घरों में नल से पानी आता था। इस अल्पावधि में चार करोड़ और परिवारों को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। स्कूल, आंगनबाड़ी, आश्रम, स्वास्थ्य व सामुदायिक केंद्रों में यह काम प्राथमिकता से किया जा रहा है।

बारिश का जल न हो बर्बाद

प्रधानमंत्री ने कहा कि बारिश का पानी बर्बाद न जाए इसके लिए हमें अभी से प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान से शहरों व गांवों को समान रूप से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि बारिश आने में अभी कुछ सप्ताह का समय है। इस दौरान पानी को जमा करने के वह सभी उपाय अपने स्तर पर किए जा सकते हैं। इसमें तालाब, कुंओं ,बावडिय़ों की सफाई व गहरीकरण, इन तक पानी पहुंचने के मार्ग में यदि कोई बाधा है तो उसे दूर करने का काम आदि कार्य शामिल हैं। इसके लिए किसी सरकारी आदेश का इंतजार करने या इंजीनियरिंग की जरूरत नहीं है। सामूहिक भागीदारी से यह काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानी के महत्व को महिलाएं पुरुषों से ज्यादा बेहतर समझती हैं, लिहाजा उन्हें इस अभियान में आगे रखें।

मनरेगा की राशि जल संग्रहण काम में खर्च हो

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं तो चाहूंगा अब मनरेगा का एक-एक पैसा बारिश आने तक सिर्फ और सिर्फ इसी काम के लिए लगे। पानी से संबंधित जो भी तैयारियाँ करनी हैं, मनरेगा का पैसा अब कहीं और नहीं जाना चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाना जरूरी है। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है ताकि हम एक ऊर्जा से भरा हुआ राष्ट्र बनकर आगे बढ़ सकें।

दूषित पानी से बचाव भी जरूरी

श्री मोदी ने कहा कि देश के कई हिस्सों में विभिन्न धातु मिश्रित दूषित जल की समस्या है, जो अनेक बीमारियों को जन्म देती है। वर्षाजनित पानी के संग्रहण से इस समस्या को कम किया जा सकता है। वहीं दूषित जल से बचाव के लिए पानी का परीक्षण भी जरूरी है। केंद्र सरकार ने इस दिशा में व्यापक अभियान शुरू किया है। इसके लिए गांव-गांव में महिलाओं को प्रशिक्षत भी किया गया है।

दिलाई जल शपथ

विश्व जल दिवस के मौके पर गांव-गांव में पानी बचाने का संकल्प भी लिया गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये जल शपथ जन-जन का संकल्प व स्वभाव भी बनना चाहिए। जल को लेकर जब हमारी प्रकृति बदलेगी, तो प्रकृति भी हमारा साथ देगी। उन्होंने कहा कि शांति के समय जो सेना जितना ज्यादा पसीना बहाती है युद्ध के समय खून उतना कम बहता है। ये नियम पानी को लेकर भी लागू हाता है। पानी का संग्रहण होने पर अकाल, सूखे के समय यह प्राणी मात्र का सहारा बन सकता है। इसलिए जीवन बचाने के लिए वर्षा के पहले जितनी ज्यादा मेहनत करेंगे उतना उपकार होगा। प्रधानमंत्री ने इससे पूर्व मध्यप्रदेश समेत विभिन्न राज्यों की ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों से जल संग्रहण के लिए किए जा रहे कामों को लेकर चर्चा भी की।

केन-बेतवा लिंक परियोजना अनुबंध: प्रधानमंत्री ने मप्र, उप्र को दी बधाई

विश्व जल दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए त्रि-पक्षीय समझौते पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी में अनुबंध हुआ। इस पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल आधार पर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इसे लेकर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों व आम जनता को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुबंध बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने वाला है। श्री मोदी ने कहा कि आज इन दो नेताओं ने, इन दो सरकारों ने इतना बड़ा काम किया है जो हिन्दुस्तान के पानी के उज्जवल भविष्य के लिए इस स्वर्णिम पृष्ठ से लिखा जाएगा। इन्होंने बुंदेलखंड की भाग्य रेखा बदलने का काम किया है।

नदियों के जुडऩे से यह होगा लाभ

राष्ट्रीय नदी विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) द्वारा देश में प्रस्तावित 30 नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक केन-बेतवा लिंक परियोजना भी है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 45 हजार करोड़ है, जिसका 90 फ ीसद राशि केंद्र सरकार वहन करेगी। इस परियोजना में केन नदी से बेतवा नदी में पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए दाऊधन बांध बनाया जाएगा और एक नहर के जरिए दोनों नदियों को जोड़ा जाएगा। इससे बुंदेलखंड की जनता को सिंचाई से लेकर जल विद्युत का लाभ मिलेगा। पेयजल भी मिलेगा और सूखे का संकट भी खत्म होगा।

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