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विश्व रक्तचाप दिवस विशेष: अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण गांव में बढ़ रहे अनियंत्रित रक्तचाप के रोगी

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निरोगी काया अभियान में मिले 4.14 लाख मरीजों को दी जा रहीं नियमित दवाएं
भोपाल। आज विश्व रक्तचाप दिवस (वल्र्ड हायपरटेंशन डे) है। आमतौर मधुमेह, अनियंत्रित रक्तचाप को शहरी बीमारियां माना जाता था। लेकिन अब बदली हुई जीवनशैली और खानपान के कारण अब गांवों के लोगों का भी रक्तचाप कम ज्यादा होने लगा है। लगातार बढ़ते हाई ब्लड़ प्रेशर के मरीजों को खोजने के लिए सरकार ने दो चरणों में निरोगी काया अभियान चलाया। जिसमें प्रदेश भर के ग्रामीण इलाकों में करीब 4 लाख 14 हजार से ज्यादा ऐसे मरीज मिले जिनका रक्तचाप अनियंत्रित है। इन मरीजों को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेफर करके डॉक्टरों द्वारा जांच की गई। रक्तचाप की समस्या से ग्रसित एक कार्ड जारी कर नियमित दवाएं दी जा रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मानें तो पहले मरीजों को बाजार से मंहगीं दवाएं खरीदनी पड़तीं थीं अब वे उनके नजदीक के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स पर हर महीने मुफ्त दी जा रहीं हैं।

इन जिलों में मिले सबसे ज्यादा मरीजों में मिली रक्तचाप की समस्या
बीते साल ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सीएचओ द्वारा कराए गए घर-घर सर्वे के दौरान इंदौर में 26780, छिंदवाड़ा में 22280, कटनी में 21047, जबलपुर में 19180, बालाघाट में 17268, रायसेन में 16656, अलीराजपुर में 13640, धार में 13520, डिंडोरी में 12847, टीकमगढ़ में 12699, सिवनी में 12225, बड़वानी में 11298, सागर में 11274, अनूपपुर में 10591, मंदसौर में 10471, सतना में 9928, होशंगाबाद में 9750, खरगोन में 9035, रीवा में 8451, सीहोर में 7766, उज्जैन में 7671, रतलाम में 7359, देवास में 6995, खंडवा में 6439, मंडला में 6229, विदिशा में 6167, अशोकनगर में 6166, बेतूल में 5986, छतरपुर में 5957, भिंड में 5634, नरसिंहपुर में 5416, दमोह में 5227, ग्वालियर में 4801, गुना में 4377, सीधी में 4337, बुरहानपुर में 4192, राजगढ़ में 4178, शहडोल में 4078, श्योपुर में 3756, शिवपुरी में 3718, भोपाल में 3698, उमरिया में 3649, शाजापुर में 3358, मुरैना में 2707, हरदा में 2446, आगर मालवा में 2378, पन्ना में 2237, नीमच में 2010, झाबुआ में 1669 और दतिया में 1273 ब्लड प्रेशर के मरीज मिले हैं। इन सभी को हर महीने नियमित रूप से मुफ्त दवाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं।

30 वर्ष के बाद नियमित कराएं ब्लड प्रेशर की जांच
ब्लड़ प्रेशर एक एसिम्प्टोमेटिक बीमारी है। इसके शुरुआती दौर में लक्षण नजर नहीं आते लेकिन यदि समय पर जांच कराके दवाएं शुरू नहीं कीं तो ये बड़ी समस्या बन सकता है। अनियमित दिनचर्या, खानपान, ज्यादा वजन के कारण इसकी समस्या होने लगती है। 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से ब्लड़ प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए। बेहतर होगा वजन और खानपान नियंत्रित रखें। नमक कम खाएं औरी नियमित व्यायाम करें। अगर ब्लड़ प्रेशर की समस्या है तो दवाएं नियमित रूप से खाना चाहिए यदि बीच में दवाएं छोड दीं तो आगामी समय में किडनी, दिल, दिमाग को भी नुकसान हो सकता है। इसे एंड ऑर्गेन डैमेज कहा जाता है जिसमें अंगों को नुकसान होने लगता है। ऐसे में मरीज को ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक का भी खतरा रहता है।
डॉ. कमलेश देवपुजारी, एसोसिएट प्रोफेसर
मेडिसिन विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज

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