प्रयोगशाला से बनी इस शहद का उपयोग कर हम बचा सकते हैं लाखों मधुमखियों की जान, जानिएं कैसे

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भोपाल। दुनियां के सबसे साफ शहद प्रयोगशाला में तैयार की गई इस शहद जैसे ही दिखाई देती हैं। इस शहद की खासियत यह हैं कि इसकी खुशबू और स्वाद बिल्कूल प्राकृतिक शहद जैसा ही आता हैं। लेकिन यह मधुमक्खी के कारण नहीं आता है बल्कि एक प्रयोगशाला में तैयार किये जाने के कारण आता है। इस शहद का उपयोग किए जाने से शहद कि समस्या को आसानी से दूर कर सकते है। इसके साथ ही लाखों मधुमखियों की जान भी बचा भी सकते हैं।

आज के दौर में शहद हर किसी को पसंद होता है। आपको बता दे कि विश्व में 20,000 से अधिक प्रकार की मधुमक्खियाँ पाई जाती हैं। लेकिन इनमे से केवल 7 प्रकार की मधुमखियां ही शहद बना पाती है। लेकिन जैसे ही लोगों द्वारा इन मधुमखियों के छत्ते से शहद निकाला जाता है तो मधुमखियों को अपना छत्ता छोड़ना पड़ता है और इसके चलते अधिकतर मधुमखियों की मौत हो जाती हैं। ऐसे कर हम 7 प्रकार के कीमती मधुमखी प्रजातियों को कमजोर और वायरस के प्रति संवेदनशील बना रहे हैं।

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जबकि हमारा पूरा ग्रह मधुमक्खियों पर निर्भर है। 75% कृषि मधुमक्खियों द्वारा परागित होती है। इंसान का बहुत कुछ जीवन इन मधुमखियों पर ही निर्भर हैं क्योकि ये नहीं होगी तो फसलों की पैदावार थम सी जाएगी। अल्बर्ट आइंस्टीन ने स्वयं यह कहा था “अगर मधुमक्खी गायब गई तो इंसान 4 साल से भी अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाएंगे।

ऐसी स्थिति में सवाल यही उठता है की हम मधुमक्खियों के बिना शहद कैसे बना सकते हैं?

इज़राइल में 4 लोग (एरी, ओफ़र, यारोन, एफ़्राट) का जवाब है। उन्होंने एक कंपनी बीईई-आईओ शुरू की जो एक इन मधुमक्खी के बिना भी शहद बनाती है। कैसे तो आइये जानते है। अपनी प्रयोगशाला में मधुमक्खी का पेट बनाकर। शहद को बनाने के लिए दो चीजों की जरूरत होती है। एक पौधे से मधुरस और मधुमक्खी के पेट से प्रोटीन। इसलिए उन्हें पौधों से मधुरस मिला और उन्होंने मधुमक्खी से प्रोटीन बनाया एक मशीन का उपयोग करना।

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वे, कुछ घंटों के लिए प्रोटीन को मधुरस में मिलाते हैं और शहद के साथ आते हैं। असली दिखने वाला, असली स्वाद वाला शहद। एक मधुमक्खी अपने पूरे जीवन में केवल 1/12 वां चम्मच शहद बना सकती है! अब जब हमारे पास शहद है, तो हम मधुमक्खियों को जीवित रख सकते हैं और और वही करें जो उन्हें करना चाहिए! फूलों, वन्यजीवों को परागित करें और लिड के चक्र को चालू रखें। यह काम करने वाली यह पहली कंपनी है|

रिपोर्ट – नितिका अग्रवाल

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