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टोक्यो ओलिंपिक : ओलिंपिक में मेडल जीतना सपना सच होने जैसा, यह मेरे देश को समर्पित- मीराबाई चानू

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नई दिल्ली। टोक्यो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने के बाद भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने शनिवार को कहा कि यह सपना सच होने जैसा है और उनकी जीत के लिए प्रार्थना करने के लिए पूरे देश को धन्यवाद दिया। मीराबाई चानू ने शनिवार को टोक्यो ओलिंपिक में महिला 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत को पहला पदक दिलाया। इसके बाद उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा कहा, ‘यह वास्तव में मेरे लिए सपना सच होने जैसा है।

मैं इस पदक को अपने देश को समर्पित करना चाहता हूं और इस सफर के दौरान मेरे साथ देने के लिए भारतीयों की अरबों प्रार्थनाओं को धन्यवाद देना चाहती हूं। मैं अपने परिवार को विशेष रूप से मेरी मां को मुझ पर विश्वास करने और त्याग के लिए को धन्यवाद देना चाहती हूं।’

चानू ने आगे कहा, ‘इस सफर में निरंतर समर्थन के लिए हमारी सरकार, खेल मंत्रालय, साई, आइओए, वेटलिफ्टिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, रेलवे, ओजीक्यू, प्रायोजकों और मे मार्केटिंग एजेंसी आइओएस का समर्थन करने के लिए विशेष धन्यवाद। मैं अपने कोच विजय शर्मा सर और सहयोगी स्टाफ को उनकी निरंतर कड़ी मेहनत, प्रेरणा और प्रशिक्षण के लिए विशेष धन्यवाद देना चाहती हूं। एक बार फिर से पूरी भारोत्तोलन बिरादरी और मेरे सभी देशवासियों को धन्यवाद।’

अपने चार सफल प्रयासों के दौरान चानू ने कुल 202 किग्रा (स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 115 किग्रा) भार उठाया। चीन की होऊ झीहुई ने कुल 210 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एक नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया, जबकि इंडोनेशिया की विंडी केंटिका आइसा ने कुल 194 किग्रा उठाकर कांस्य पदक जीता।

रजत पदक जीतने के साथ, चानू ओलंपिक पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय भारोत्तोलक बन गई हैं। इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 सिडनी खेलों में 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था, जब पहली बार भारोत्तोलन क्षेत्र महिलाओं के लिए खोला गया था।

कौन हैं मीराबाई चानू

मणिपुर की राजधानी इम्फाल की रहने वाली मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को इम्फाल में हुआ था। 26 वर्षीय मीराबाई चानू को बचपन में तीरंदाजी का शौक था और वो इसी में अपना करियर भी बनाना चाहती थी, लेकिन 8वीं कक्षा के बाद उनका झुकाव वेटलिफ्टिंग की ओर हो गया और फिर उन्होंने इसी में आगे बढ़ने का फैसला किया। दरअसल इम्फाल की वेटलिफ्टर कुंजरानी को प्रेरणा मानकर चानू भी भारोत्तोलन में दिलचस्पी लेने लगी थी।

चानू ने 11 साल की उम्र में एक लोकल वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था। बाद में, उन्होंने विश्व और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप प्रतिस्पर्धा में भाग लेकर अपने अंतर्राष्ट्रीय भारोत्तोलन करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने दोनों में पदक जीते।

काफी संघर्ष के बाद मीरा चानू ने हासिल किया मुकाम

मणिपुर की मीराबाई चानू ने यकीनन भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर रौशन कर दिया है हालांकि वह पहले भी कई बार अपनी काबिलियत के दम पर देश को फख्र का मौका दे चुकी हैं लेकिन उनके लिए ये मुकाम हासिल करना इतना आसान न था। अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा है तब जाकर आज उन्हें ये बुलंदी हासिल हुई है। इस पूरे सफर के दौरान चानू को उनके परिवार का पूरा सहयोग मिला। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद उनके माता-पिता ने हर कठिनाई का सामना करते हुए चानू की आहार संबंधी जरूरतों से लेकर कई अन्य जरूरते पूरी की। उसी का नतीजा है कि चानू लगातार अपने परिवार और देश का नाम ऊंचा कर रही हैं।

मीराबाई चानू पहले भी जीत चुकी हैं कई मेडल

मीराबाई चानू अब तक देश के लिए कई मेडल जीत चुकी हैं. साल 2014 में ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। 2016 के रियो ओलंपिक गेम्स के क्वालीफाई मैच में चानू ने अपनी प्रेरणा वेटलिफ्टर कुंजरानी को हराकर रियो ओलंपिक्स में अपनी जगह बनाई थी। मीराबई ने 2017 में हुई वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं 2018 में कॉमन वेल्थ गेम्स में भी चानू ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

अप्रैल 2021 में ताशकंद में एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप के दौरान, मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किग्रा क्लीन एंड जर्क में 119 किग्रा भार उठाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। दूसरी ओर, चानू को स्नैच में खराब प्रदर्शन के कारण एशियाई मीट में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था।

मीराबाई चानू को कई खेल सम्मान मिल चुके हैं

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने चानू को सम्मानित किया और उन्हें 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया। उन्हें 2018 में भारत के सर्वोच्च नागरिक खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। चानू को 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

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