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सरकारी कब्जे से मंदिरों को मुक्त करना चाहिए : मिलिंद परांडे

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मतांतरण रोकने के लिए केंद्रीय कानून बनाया जाए, सरकारी कब्जे से मंदिरों को अलग रखने न्यायालय की शरण भी लेगा विहिप
भोपाल। देश में मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्ति मिलनी चाहिए। मंदिरों की संपत्ति का उपयोग अन्य धर्मों के कार्यों में नहीं होनी चाहिए। मंदिरों में आए दान च वढ़ावे की राशि का उपयोग मंदिरों के रखरखाव और हिंदू धर्म के प्रचार के लिए हो। प्रलोभन देकर कराए जाने वाले मतांतरण को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून बनना चाहिए। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मतांतरण रोकने के लिए इस तरह के कानून बनाए गए हैं, लेकिन केंद्रीय स्तर पर भी कानून बनना चाहिए। उक्त बातें शुक्रवार को भोपाल में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने पत्रकारों से चर्चा में कही हैं। विश्व संवाद केंद्र में पत्रकारों को संबोधित करते हुए केंद्रीय महामंत्री श्री परांडे ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद का यह सुविचारित मत है की हिन्दू मंदिरों का संचालन पूर्णता हिन्दू समाज को ही करना चाहिए। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) इसके समाज का व्यापक जागरण, न्यायालय में प्रयास ऐसे सभी दृष्टि से प्रयास करेगा।

प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन जारी
पत्रकारों से चर्चा में केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि हिन्दुओं को ईसाई मिशनरीज द्वारा प्रलोभन देकर मतांतरण कराया जाता है। यह एक राष्ट्रीय स्तर की समस्या है। उसके लिये हम एक केंद्रीय कानून की भी मांग करते हैं। लव जिहाद की समस्या भी इस कानून के अंतर्गत आनी चाहिए। अकाल तख्त तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी द्वारा पंजाब में ईसाई मिशनरियों के किये जानेवाले षड्यंत्रों पर वक्तव्य भी इस गहराते हुए खतरे की ओर साफ संकेत दे रहा है।

पूर्वोत्तर व दक्षिण भारत में अधिक समस्या
श्री परांडे ने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों में मतांतरण बड़े पैमाने पर कराया जाता है। वहां चार राज्यों में हिंदुओं की संख्या तेजी से घट रही है। इसी तरह दक्षिण भारत के चार राज्यों में हिंदुओं के मंदिरों की संपत्तियों को दूसरे धर्मों के लिए उपयोग किया जा रहा है।

बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाए भारत
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर चल रहे निरंतर अत्याचारों के विरुद्ध विश्व हिन्दू परिषद ने 21 अक्टूबर को देश भर में प्रदर्शन किये हैं। देश के अधिकांश जिलों की प्रतिक्रिया एक समान है। सभी जगह बांग्लादेश के वर्तमान हालातों में हिन्दुओं के साथ हो रहे अत्याचार पर आक्रोश है। मिलिंद परांडे ने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार पर दबाव डालने का प्रयास करे। बांग्लादेश की यह भयानक घटनाएं नागरिक संशोधन कानून (सीएए) की सार्थकता और आवश्यकता पुन: बताने के लिए पर्याप्त है।

संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी पर उठाए सवाल
श्री परांडे ने कहा कि अधिकांश मामलों में स्वत: संज्ञान लेने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा, जब भी हिंदुओं के मानवाधिकारों की बात आती है, ये संगठन कार्रवाई करने से क्यों शर्माते हैं। उन्होंने सभी हिन्दू संगठनों से इसे विश्व स्तर पर पुरजोर तरीके से उठाने का आह्वान किया। वहीं, साथ में यह भी जोड़ा कि वर्तमान हालातों को देखते हुए बांग्लादेश में स्थिति और खराब होने की आशंका है क्योंकि स्थानीय आतंकवादी संगठनों द्वारा इस तरह के हमले हिन्दू समुदाय पर करने की कथित अपील जो की गई है। उन्होंने कहा, इससे बांग्लादेश का अल्पसंख्यक समुदाय और भी ज्यादा डरा हुआ है। इसलिए आज विश्व हिन्दू परिषद यह मांग करती है कि बांग्लादेश सरकार को अपने अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही कट्टरपंथी जिहादियों पर अंकुश लगाना चाहिए। वह मृतक हिंदुओं के परिवार को सुरक्षा के साथ उनकी और ऐसे सभी हिन्दुओं को जिनका कि संपत्ति का नुकसान हुआ है या जो घायल हैं, उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता मुहैया कराए।

राम मंदिर नींव का निर्माण कार्य पूरा
केंद्रीय महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद मिलिंद परांडे का कहना यह भी था कि श्रीरामजन्मभूमि परिसर में मंदिर की नींव के निर्माण का कार्य लगभग संपन्न हो गया है। अभी प्रत्यक्ष मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा। दिसम्बर 2023 तक भगवान श्री रामलला गर्भगृह में विराजमान हो जाएंगे, ऐसा हम सभी का विश्वास है। इस पत्रकार वार्ता में क्षेत्र मंत्री राजेश तिवारी, प्रान्त मंत्री पप्पू जी वर्मा, प्रान्त उपाध्यक्ष ब्रजेश चौहान भी उपस्थित रहे।

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