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सुशील चन्द्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार ग्रहण किया

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने मंगलवार को भारत के 24वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया। वरिष्ठतम चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने सुनील अरोड़ा का स्थान लिया, जिनका कार्यकाल कल समाप्त हो गया था।

चंद्रा को 2019 में चुनाव आयोग में शामिल किया गया था। उनके मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में चुनाव होंगे। वहीं चुनाव आयुक्त रहते हुए उनके अंतर्गत 10 राज्यों में चुनाव हुए हैं और नामांकन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हुई है। चुनाव आयुक्त से पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष थे।

जीवन परिचय

चंद्रा 1980 के भारतीय राजस्व सेवा बैच के अधिकारी हैं। वह 15 फरवरी 2019 से ईसीआई में चुनाव आयुक्त हैं। वह 18 फरवरी 2020 से जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश के परिसीमन के बाद परिसीमन आयोग के सदस्य भी हैं। लगभग 39 वर्षों तक आयकर विभाग में कई पदों पर रहने के बाद उन्हें एक नवंबर 2016 को सीबीडीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने काफी समय तक निदेशक और अन्वेषण महानिदेशक के तौर पर मुंबई और गुजरात काम किया।

15 मई 1957 को जन्मे चंद्रा ने आईआईटी रुड़की से सिविल में बीटेक किया है। उन्होंने देहरादून के डीएवी कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी ली है और प्रबंधन में आईएमएफ, आईआईएम बेंगलुरु और व्हार्टन में विभिन्न प्रशिक्षण ले चुके हैं। भारतीय राजस्व सेवा में शामिल होने से पहले वह भारतीय इंजीनियरिंग सेवा में थे।

‘मनी पावर’ के खिलाफ अभियान

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया और सभी के लिए समान परिस्थितियों के निर्माण में राजनीतिक धन की पारदर्शिता और शुचिता महत्वपूर्ण है। अपने अनुभवों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने आयोग में काले धन के खतरे के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। चुनाव प्रक्रिया में ‘मनी पावर’ के उपयोग को रोकने के लिए चुनाव आयुक्त के रूप में वह सक्रिय रहे। उन्होंने लगातार ‘इंडक्शन-फ्री’ चुनावों की अवधारणा पर जोर दिया और यह सभी वर्तमान और आगामी चुनावों में चुनाव प्रक्रिया में निगरानी का एक अभिन्न आयाम बन गया है।

उन्होंने विधानसभा चुनावों के दौरान अक्सर उपयोग किए जाने वाले अवैध धन का पता लगाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनकी निरंतर निगरानी से नकदी, शराब, मुफ्त, नशीले पदार्थों की बरामदगी हाल के चुनावों में काफी बढ़ गई है। उनका योगदान फॉर्म 26 की तरह प्रणालीगत परिवर्तनों में भी दिखाई देता है, जो अब आवश्यक कागजी कार्रवाई का एक अभिन्न अंग बन गया है। सीबीडीटी के अध्यक्ष के रूप में चंद्रा ने चुनाव से पहले उम्मीदवारों द्वारा दायर हलफनामों के सत्यापन के क्षेत्र में विशेष प्रयास किए। 2018 में अध्यक्ष रहते हुए चंद्रा ने उम्मीदवारों के शपथ पत्रों में उल्लिखित सभी संपत्तियों और देनदारियों का विवरण साझा करने का एक समान प्रारूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर प्रक्रियाओं का सरलीकरण

प्रौद्योगिकी के उपयोग के शौकीन समर्थक चंद्रा ने चुनावी प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए हाल के आईटी प्रयोगों के कार्यान्वयन की देखरेख की है। 2019 में 17वीं लोकसभा के चुनाव और बाद के आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली के चुनावों के दौरान नए आईटी प्रयोगों के माध्यम से प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में उनका योगदान रहा है।

कोविड की चिंताओं के बीच बिहार, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की राज्य विधानसभाओं के चुनावों का आयोजन और नामांकन प्रक्रिया को ऑनलाइन करना, वरिष्ठ नागरिकों की विशिष्ट श्रेणियों, दिव्यांग व्यक्तियों, आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मियों, कोविद रोगियों व संदिग्ध मरीजों के लिए पोस्टल बैलेट का विकल्प प्रदान करना उनका नेतृत्व दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग

चंद्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्वाचन प्रबंधन निकायों के बीच सर्वश्रेष्ठ चुनावी प्रथाओं के आदान-प्रदान में सहायक रहे हैं। जून 2019 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में कजाकिस्तान की राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया में भाग लिया। उन्हें जुलाई 2019 में ब्रिटेन के कैम्ब्रिज में कॉमनवेल्थ ट्रिनिटी कॉलेज में चुनावी लोकतंत्र पर 18वें कैंब्रिज सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने नवंबर 2019 में मैक्सिको के लॉस काबोस में आयोजित ग्लोबल नेटवर्क इलेक्टोरल जस्टिस कॉन्फ्रेंस की तीसरी पूर्ण सभा में भाग लिया। दिसम्बर 2019 में बाली में दूसरा चुनावी अध्ययन कार्यक्रम सम्मेलन में उन्होंने भाग लिया।

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