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अब तक 13 जिलों में 54 ब्लैक फंगस मरीजों की मौत, इनमें 53 फीसदी दूसरे जिलों में करा रहे थे इलाज

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समय से नहीं मिलने से भोपाल के अस्पतालों में 15 ब्लैक फंगस मरीज तोड़ चुके हैं दम
भोपाल।
कोरोना के संक्रमण की दूसरी लहर भले कमजोर पड़ रही हो लेकिन छोटे जिलों में अव्यवस्थाएं कम नहीं हो रहीं हैं। समय से कोरोना मरीजों को सही इलाज की व्यवस्था न होने पर उन्हें सैकडों किलोमीटर दूर गंभीर अवस्था में भोपाल लाना पड़ा। यहां भी भटकने के बाद अस्पतालों में जैसे तैसे बिस्तर मिले लेकिन हालत खराब होने के कारण वे दम तोड़ रहे हैं। अब तक राजधानी में जिन 15 ब्लैक फंगस के मरीजों की मौतें हुई वे सभी दूसरे जिलों के रहने वाले थे। गृह जिले में सही इलाज न मिलने के कारण हालत बिगड़ी और भोपाल आकर कुछ ही दिनों के भीतर मरीजों ने दम तोड़ दिया।

भोपाल में इन जिलों के 15 मरीजों ने तोड़ा दम
राजधानी के हमीदिया अस्पताल में जिन 14 मरीजों की मौतें हुईं उनमें विदिशा के तीन, हरदा-होशंगाबाद के दो-दो, सीहोर, छिंदवाड़ा, बैतूल, रायेसन, अशोकनगर, शाजापुर, बैतूल के एक-एक ब्लैक फंगस मरीज की मौत हुई है। एक निजी अस्पताल में सागर के 70 वर्षीय मरीज की मौत हुई है।

13 जिलों में मरने वाले 54 में सिर्फ 25 मरीज ही स्थानीय निवासी
ब्लैक फंगस से भोपाल सहित प्रदेश के 13 जिलों में 54 मरीजों की मौतें हुईं हैं। इनमें 25 मरीज स्थानीय निवासी थे। जबकि 29 मरीज ऐसे थे जो दूसरे जिलों के रहने वाले थे। यही नहीं उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र के भी एक-एक मरीज की ग्वालियर के अस्पताल में उपचार के दौरान मौतें हुईं हैं।

एंटी-फंगल दवाएं न होने के कारण हमीदिया कर दिया था रेफर

भोपाल में जिन 15 मरीजों की मौतें, उनमें सीहोर के आष्टा तहसील के वनखेड़ा निवासी मुकेश मालवीय सबसे कम उम्र (34 वर्ष)के मरीज थे। मुकेश का डायलिसिस चलता था। 6 मई को वे पॉजिटिव आए। कुछ दिन वे घर पर ही रहे तीसरे दिन तबियत बिगड़ी तो स्थानीय अस्पतालों में दिखाया लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला।भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां डायलिसिस हुआ जांच हुई तो ब्लैक फंगस मिला लेकिन पीपुल्स के डॉक्टरों ने एंटी फंगल इंजेक्शन की कमी के कारण हमीदिया रेफर कर दिया। यहां करीब तीन दिन भर्ती रहने के बाद मुकेश जिन्दगी की जंग हार गए।

छिंदवाड़ा में डॉक्टरों ने नहीं दिया ध्यान, दवाई से शुगर बढ़कर 600 पहुंची
छिंदवाडा के कैलाश नगर की रहने वाली छाया बेले की हमीदिया में 25 मई को मौत हो गई थी। 29 अप्रैल को छाया का पूरा परिवार पॉजिटिव आया था। डॉक्टर को दिखाया तो उन्हें फेबिफ्लू दवाएं दीं। तबियत में सुधार नहीं हुआ तो जिला अस्पताल में भर्ती हुए लेकिन यहां बच्चा वार्ड में कई दिनों से पड़ी गंदगी के बीच उन्हें भर्ती कर दिया। लेकिन अचानक उनकी शुगर बढऩे लगी। खाना-पीना बंद कर दिया तो घबराए परिजनों ने डॉक्टरों उन्हें कहीं और ले जाने के लिए कह दिया। परिजन 20 मई को एम्स लेकर पहुंचे। यहां से हमीदिया जाने को कह दिया। हमीदिया में रात दो बजे कोरोना की हाल की जांच रिपोर्ट न होने के कारण भर्ती नहीं किया। कोविड टेस्ट कराया तो फिर पॉजिटिव आईं। उन्हें कोविड वार्ड में भर्ती कर दिया। तीन दिन में ही उनकी हालत बिगड गई। आईसीयू से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया। लेकिन 25 मई को वें जिंदगी की जंग हार गईं। छाया के पति का कहना है कि मौत के बाद ये बताया गया कि वे ब्लैक फंगस से भी पीडि़त थीं।

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