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अमित शाह से मिले शरद पवार और प्रफल्ल पटेल, शाह बोले- ये बताने की बात नहीं

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NEW DELHI, MAR 28 (UNI):- Union Home Minister Amit Shah addressing a press conference at his residence in New Delhi on Sunday.UNI PHOTO-JA6U
  • नई दिल्ली में गृहमंत्री के बयान बढ़ाई राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एंटीलिया केस के आरोपी सचिन वझे के राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख से रिश्तों पर सियासत गर्माई हुई है। इस बीच, उद्धव सरकार में सहयोगी राकांपा के दो बड़े नेताओं की गुजरात यात्रा ने सरकार की नींद उड़ा दी है। खबर यह है कि शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल ने अहमदाबाद में गृह मंत्री अमित शाह से आधी रात के बाद मुलाकात की है।

शाह की पवार से मुलाकात को महाराष्ट्र में सरकार चला रही महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब शाह से पूछा गया कि आप कल अहमदाबाद में थे और बताया जा रहा है कि वहां आपकी शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात भी हुई है, इस पर शाह ने जवाब दिया कि ये सब चीजें सार्वजनिक नहीं होती हैं। शाह के इस बयान से कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है।

शाह का दावा- बंगाल में पहले चरण की 26 सीटें जीतेंगे

अमित शाह ने कहा कि असम और बंगाल इस चुनाव से पहले चुनावी हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले प्रदेश थे। दोनों जगह पहले चरण में शांतिपूर्ण मतदान हुआ। कोई बम, गोली नहीं चली, किसी की जान नहीं गई। ये आने वाले समय के लिए शुभ संकेत हैं। शाह ने दावा किया कि बंगाल में भाजपा पहले चरण की 30 में से 26 सीटें जीतेगी। शाह ने कहा कि बंगाल में हमारा वोट भी बढ़ेगा और हमारी सीटों पर जीत का अंतर भी बढ़ेगा। वहीं, असम में 47 में से 37 सीटों पर भाजपा को जीत मिलेगी। शाह ने कहा कि बंगाल में 200 और असम में पहले से ज्यादा सीटें लाकर सरकार बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में असम में जो विकास हुआ है, वहां की हमारी सरकार ने जिस प्रकार से अभूतपूर्व विकास किया है, इसको बड़ा जन समर्थन मिल रहा है। डबल इंजन सरकार का कॉन्सेप्ट असम की जनता को भाजपा के आचरण से समझ में आया है।

मुकुल रॉय के ऑडियो पर शाह का ममता सरकार पर निशाना

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाह ने भाजपा सांसद मुकुल रॉय का ऑडियो लीक होने को लेकर बिना नाम लिए ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दो भाजपा नेता फोन पर अधिकारियों के ट्रांसफर की बात पर चर्चा कर रहे थे। यह मांग तो हमने लिखित में की है। इसमें कोई राज नहीं है। फोन टैप करने वाले के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। किस अधिकार के तहत फोन टैप किए गए। इसके लिए किसने सूचना दी, किसने परमिशन दी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में फोन टैपिंग क्यों? वो भी तब जब आचार संहिता लागू हो।

दुर्घटनावश गृह मंत्री बने अनिल देशमुख : शिवसेना

इधर, एंटीलिया, सचिन वझे और गृह मंत्री पर लगे वसूली के आरोपों के बीच रविवार को शिवसेना के मुखपत्र में छपे लेख से महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से उबाल आ गया है। विपक्ष के हमलों के बाद शिवसेना के सांसद संजय राउत ने रविवार को कहा कि गृह मंत्री को सचिन वझे की वसूली की जानकारी न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। उन्होंने अनिल देशमुख को दुर्घटनावश बने मंत्री बताते हुए उन्हें नसीहत भी दी है। विपक्ष को भी जता दिया कि लाख कोशिश कर लो महाविकास अघाड़ी की सरकार नहीं गिरेगी। वहीं, राउत के लेख पर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने नाराजगी जताई है। पवार ने कहा कि महाविकास अघाड़ी सरकार के प्रमुख नेताओं को इस तरह के बयान देकर सरकार को मुश्किल में लाने का काम नहीं करना चाहिए।

सचिन वझे को इतने अधिकार किसने दिए?

संजय राउत ने लेख में पूछा कि आखिर सस्पेंड पुलिस अधिकारी सचिन वझे की वसूली की जानकारी गृह मंत्री को कैसे नहीं हुई? राउत ने आगे लिखा कि आखिर असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी सचिन वझे को इतने अधिकार किसने दिए? यही जांच का विषय है। पुलिस कमिश्नर, गृह मंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा व विश्वासपात्र रहा सचिन वझे महज एक API था, लेकिन उसे सरकार में असीमित अधिकार किसके आदेश पर दिया गया।

वरिष्ठ नेताओं के इनकार के बाद देशमुख बने मंत्री

राउत ने आगे लिखा कि संगठन के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और दिलीप वलसे पाटिल ने गृह मंत्री का पद लेने से इनकार कर दिया था। इसलिए शरद पवार ने अनिल देशमुख को गृह मंत्री बना दिया। आज मौजूदा सरकार के पास डैमेज कंट्रोल की कोई योजना नहीं है। संदिग्ध व्यक्ति के घेरे में रहकर राज्य के गृह मंत्री पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति काम नहीं कर सकता है। पुलिस विभाग पहले ही बदनाम है। उस पर इतने सारे आरोपों से संदेह बढ़ता है।

राजभवन की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठाया

राउत ने राजभवन की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इस पूरे दौर में क्या किया? ठाकरे सरकार जल्दी से गिर जाए, इसके लिए राज्यपाल राजभवन के समुद्र में बैठकर ईश्वर का जलाभिषेक कर रहे हैं। एंटीलिया और परमबीर सिंह की चिट्ठी के बाद राज्यपाल सरकार गिरने की उम्मीद लगाकर बैठे थे। उस पर भी पानी फिर गया। महाराष्ट्र के भाजपा नेता आए दिन राज्यपाल से मिल रहे हैं। दिल्ली जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। सरकार की बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं, इससे राजभवन की प्रतिष्ठा भी कलंकित हुई है।

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