Home खास ख़बरें 24 घंटे में काम पर लौटें जूडा : हाईकोर्ट, छह मेडिकल कॉलेज...

24 घंटे में काम पर लौटें जूडा : हाईकोर्ट, छह मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने दिए इस्तीफे

14
0
  • जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर मप्र हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने भी की कार्रवाई
  • मप्र आयुर्विज्ञान विवि ने 501 चिकित्सा छात्रों के नामांकन किए रद्द
  • जबलपुर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद जूडा ने दिए सामूहिक इस्तीफे, बोले- सरकार के प्रतिनिधि हमसे बात ही नहीं कर रहे

भोपाल/जबलपुर, स्वदेश संवाददाता

प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों (चिकित्सा छात्रों) द्वारा की जा रही हड़ताल को मप्र उच्च न्यायालय ने अवैध घोषित करते हुए उन्हें 24 घंटे के भीतर काम फिर से शुरू करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर राज्य सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है।

हाईकोर्ट ने कोरोना काल में डॉक्टरों द्वारा हड़ताल करने की निंदा करते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में डॉक्टरों को हड़ताल का सहारा नहीं लेना चाहिए। इस समय हड़ताल करने से डॉक्टरों के कार्य को सराहा नहीं जा सकता है। उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ जबलपुर ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक एवं न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल की युगलपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

6 मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स ने दिए सामूहिक इस्तीफे

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सबसे पहले ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज के तीन सौ जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफे डीन को सौंप दिए। इधर भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता करके सरकार की ओर से बातचीत के लिए सकारात्मक पहल न किए जाने का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफे दे दिए।

मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 501 डॉक्टरों के नामांकन किए रद्द

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के वर्ष 2018 के 37 पीजी छात्रों के नामांकन रद्द कर दिए गए। जबकि गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के 95 हडताली जूनियर डॉक्टरों के नामांकन रद्द किए गए। एमजीएम इंदौर के 189, एसएमसीएच रीवा के 173,जीआरएमसी ग्वालियर के 71 चिकित्सा छात्रों के नामांकन रद्द करने के आदेश जारी किए गए हैं।

इसलिए हैं डॉक्टर हड़ताल पर

मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टर अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। तीन हजार से अधिक डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से अस्पतालों में भर्ती ब्लेक फंगस से पीडि़त मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ है। जूनियर डॉक्टर मुख्य तौर पर अपना मानदेय बढ़ाने और कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर उन्हें और उनके परिवार के लिए मु्फ्त इलाज की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा डॉक्टर यह चाहते हैं कि उनकी कोविड ड्यूटी को एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा मानकर बांड से मुक्त किया जाए। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि सरकार अभी तक उन्हें सिर्फ आश्वासन दे रही है इसलिए उन्हें हड़ताल का सहारा लेना पड़ा है।

60 से 70 हजार रूपए प्रतिमाह मिल रहा है मानदेय

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार डॉक्टरों को प्रतिमाह 60 से 70 हजार रूपए मानदेय दिया जा रहा है। छह मांगों में से चार मांगे मान ली गई है फिर भी वे अपने जिद्दी रवैए पर कायम हैं। श्री सारंग ने कहा था कि अगर डॉक्टर काम पर नहीं लौटे तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बाध्य होगी। हड़ताल के चलते कुछ मरीजों की मौत हो चुकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here