आरक्षण मामले की सुनवाई आज, सरकार प्रभावी तरीके से रखेगी ओबीसी मामले में पक्ष

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पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर है विवाद, केंद्र भी राज्य सरकार के साथ


भोपाल। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण मामले में लगी रोक हटाने राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में दायर पुनर्विचार याचिका पर बहुप्रतीक्षित सुनवाई कल होगी। इस प्रकरण में केंद्र सरकार ने भी स्वयं को वादी बनाने का आग्रह न्यायालय से किया है। वहीं मप्र पिछड़ा वर्ग संगठन की ओर से भी एक याचिका दायर है। न्यायालय तीनों ही याचिका पर संयुक्त सुनवाई करेगा।


सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार अपनी याचिका के पक्ष में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को लेकर प्रभावी दलीलें पेश करेगी। इसकी जरूरी तैयारी भी की गई है। बताया जाता है कि सरकार आरक्षण को लेकर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रिपल टेस्ट को लेकर दिए गए निर्देश के पालन में उठाए गए कदमों की जानकारी देगी। इनमें गत दिनों मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन,इसके माध्यम से जिला कलेक्टरों से उक्त वर्ग की आबादी के आकलन को लेकर बुलाई गई रिपोर्ट,आयोग की सिफारिश पर अध्ययन के लिए मंत्रिपरिषद उपसमिति के गठन के अलावा प्रदेश की सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग के रिक्त पदों को लेकर जुटाई गई जानकारी भी न्यायालय में पेश करेगी। इस समूची कवायद के पीछे इरादा यही है कि प्रदेश में इस वर्ग को सरकार की मंशा अनुरूप 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सके।

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रिक्त हैं 22 हजार पद


राज्य शासन ने अपनी दलील को मजबूत करने के इरादे से इस वर्ग के रिक्त पदों की जानकारी भी विभिन्न विभागों से जुटाई। इसके अनुसार,प्रदेश में उक्त संवर्ग का करीब 22 हजार पदों का बैकलॉग बना हुआ है। आरक्षित श्रेणी के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए राज्य सरकार विशेष अभियान चला रही है,लेकिन ओबीसी वर्ग के आरक्षण प्रतिशत को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण इस वर्ग के बैकलॉग पदों की पूर्ति का मामला अटका हुआ है।


ज्ञात हो कि पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग को इसकी आबादी के मान से 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिलाने व इसके आधार पर ही पंचायत चुनाव कराए जाने को लेकर राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संकल्प पारित किया गया था। बाद में पंचायत चुनाव से जुड़ा अध्यादेश निरस्त कर दिया गया। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को भी उसके द्वारा घोषित पंचायत चुनाव कार्यक्रम को निरस्त करना पड़ा। सरकार अब नए सिरे से पंचायतों का परिसीमन करा रही है। उसे उम्मीद है कि न्यायालय का फैसला ओबीसी वर्ग के पक्ष में आएगा। इसके बाद पंचायत चुनाव नए आरक्षण प्रतिशत के साथ कराए जा सकेंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट बिना ट्रिपल टेस्ट कराए आरक्षण प्रतिशत तय करने व संविधान की मंशा अनुरूप 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने से साफ इंकार कर चुका है।

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मप्र में आरक्षण का गणित
प्रदेश में पहले ही अनुसूचित जनजाति को 20 प्रतिशत,अनुसचित जाति को 16 प्रतिशत,पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत व गरीब सवर्ण के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था लागू है। राज्य सरकार ने गत दिनों एक स्टैंडिंग आदेश जारी कर पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने करने के निर्देश दिए थे। इसे मिलाकर प्रदेश में आरक्षण का प्रतिशत 73 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

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