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हादसे की दहशत, कोई नींद से जाग रहा है, कोई रो रहा है तो कोई चिल्ला रहा है

  • दुर्घटना में मारे गए हैं तो कुछ लोगों ने अपने दोस्तों को खो दिया है।
  • 105 मरीजों में से करीब 40 लोगों में डिसऑर्डर के शिकार हो गए है।
    नई दिल्ली।
    बालासोर रेल हादसे में बचे कई लोग शारीरिक चोटों से उबर रहे हैं, लेकिन कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती 105 मरीजों में से करीब 40 लोगों में डिसऑर्डर के शिकार हो गए है। यह लोग दहशत के मारे अचानक नींद से जाग उठते हैं, जबकि कोई जागते हुए ही बीच-बीच में उठकर रोने लगता है। इनमें से कई लोग जहां चिड़चिड़ी प्रवृत्ति के हो गए हैं, वहीं दहशत इनके चेहरे पर साफ नजर आती है। इनमें से कुछ लोगों के अपने परिजन दुर्घटना में मारे गए हैं तो कुछ लोगों ने अपने दोस्तों को खो दिया है। ट्रेन हादसे के शिकार होने के बाद कई लोगों की जहां मौत हो चुकी है, वहीं कई लोगों की अब तक शिनाख्त नहीं हुई है,लेकिन बुरी हालत उन लोगों की है, जो जिंदा तो बच गए, लेकिन दहशत उन पर इस कदर हावी है कि दिनभर वे मायूसी की हालत में बैठे रहते हैं। इनमें से कई लोग अजीब सी हरकत करते दिखाई देते हैं तो कुछ लोग रात में नींद से जाग उठते हैं और चिल्लाने लगते हैं। ट्रेन हादसे में बचे इन लोगों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डाक्टरों ने उनकी काउंसलिंग शुरू कर दी है। अस्पताल के डॉ. महापात्रा ने कहा कि जीवित बचे लोगों के दिमाग पर इस तरह की दुर्घटना का गंभीर प्रभाव पडऩा स्वाभाविक था। उन्होंने कहा, कई घायल व्यक्ति गंभीर रूप से तनावग्रस्त, भयभीत और कभी-कभी घबराए हुए देखे गए। हम उनके परिवार के सदस्यों के साथ उनसे बात कर रहे हैं। इन लोगों की काउंसलिंग के लिए चार टीम का गठन किया है। प्रत्येक टीम में एक मनोचिकित्सक, एक मनोवैज्ञानिक, एक सामाजिक कार्यकर्ता और रोगी के परिवार के एक या दो सदस्य शामिल हैं। इनमें से कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया है तो कई अपने मित्रों से बिछड़ गए हैं।

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