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सचिन वजे को मीठी नदी लेकर पहुंची एनआइए की टीम, गोताखोरों के हाथ लगे नंबर प्लेट, हार्ड डिस्क, डीवीआर समेत अहम सबूत

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मुंबई। एंटीलिया केस में जांच के तहत एनआईए रविवार को सचिन वाजे को लेकर मीठी नदी पहुंची। एनआईए को नदी में से नंबर प्लेट और डीवीआऱ समेत कई सबूत मिले। माना जा रहा है कि डीवीआर को नष्ट कर नदी में फेंका गया। नदी से दो सीपीयू और एक हार्ड डिस्क गोताखोरों को मिला। दो नंबर प्लेट बरामद हुए हैं, दोनों पर एक ही नंबर लिखा है।

एनआईए को नदी से क्या-क्या मिला?

हार्ड डिस्क
दो सीपीयू
नंबर प्लेट
एक प्रिंटर
एक लैपटॉप

सूत्रों के मुताबिक, लगातार इनफॉर्मेशन मिलने के बाद ही गोताखोरों को जांच एजेंसी ने पानी में उतारा। जांच एजेंसी का माना है कि ये सारी चीजें एंटीलिया और मनसुख हिरेन केस से जुड़ी हैं।

3 अप्रैल तक एनआईए की हिरासत में है सचिन वाजे

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एक गाड़ी में जिलेटिन की छड़ें मिलने के मामले में गिरफ्तार किए गए निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे 3 अप्रैल तक एनआईए की हिरासत में हैं। पहले 25 मार्च तक एनआईए की हिसात में भेजा गया था जिसे बढ़ाकर 3 अप्रैल तक कर दिया गया है। एनआईए ने सचिन वाजे को 13 मार्च को गिरफ्तार किया था।

इससे पहले एनआईए के अधिकारी 25 मार्च की शाम सचिन वाजे को ठाणे स्थित रेती बुंदर क्रीक लेकर पहुंची थी, जहां कारोबारी मनसुख हिरेन का शव मिला था। मनसुख हिरेन की पत्नी ने सचिन वजे पर हत्या में भूमिका होने का आरोप लगाया था।

वझे के अनुसार, इस मामले से उसका कोई लेनादेना नहीं है। उसे सिर्फ बलि का बकरा बनाया जा रहा है। जज पीआर सितरे की अदालत में वाझे के वकील ने एनआइए की हिरासत बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा कि आपको जो भी जांच करनी हो कीजिए। लेकिन उसे एनआइए की हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। वाझे के वकील ने एक दिन पहले ही उस पर लगाई गई यूएपीए की धाराओं का विरोध करते हुए सवाल किया कि एनआइए ने ये धाराएं कैसे लगा दीं? सिर्फ जिलेटिन की छड़ों से विस्फोट नहीं किया जा सकता। उसके लिए डिटोनेटर की जरूरत होती है। जोकि कथित स्कार्पियो में नहीं पाया गया। इसे आतंकी घटना भी नहीं माना जा सकता। न ही इससे समाज या देश को कोई खतरा था। वाझे ने कोर्ट को यह भी बताया कि अभी उसने एनआइए के सामने कोई कबूलनामा नहीं दिया है। वह अपना लिखित निवेदन कोर्ट को देना चाहता है।

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