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कोरोना महामारी में मतभेद भुलाकर सामूहिक प्रयास करें : मोहन भागवत

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‘पाजिटिविटी’ अनलिमिटेड व्याख्यानमाला के समापन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने कहा-
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि कोरोना महामारी से हम जीतेंगे। इस अभूतपूर्व संकट में गुणदोष भुलाकर और मतभेदों को दूर करके सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना है, शैक्षिक व्यवस्था ठप होने से जो लोग पिछड़ रहे हैं, उनकी सहायता के लिए हाथ बढ़ाने है और जिनका रोजगार छिन गया है, न मदद कर अर्थव्यवस्था के संकट से निपटने में सहायक बनना है। हमें ऐसे लोगों का ग्राहक बनकर आर्थिक संबल देना चाहिए जो वैकल्पिक रोजगार जुटाकर रोजी जुटा रहे हैं।
श्री भागवत पांच दिवसीय व्या यानमाला ‘पाजिटिविटी अनलिमिटेड’ के अंतिम दिन शानिवार को देश भर के श्रोताओं का ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। देश में कोरोना के कारण समाज में फैली नकारात्मकता दूर करने के उद्धेश्य से आयोजित इस व्याख्यानमाला में सामाजिक सरोकारों से जुड़े उद्योगपति अजीम प्रेमजी, नृत्यांगना डॉ. सोनल मानसिंह, शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती, श्री श्री रविशंकर, जग्गी वासुदेव व मुनिश्री प्रमाणसागरजी, साधवी ऋतंभरा जी जैसी सुविख्यात हस्तियों ने भाग लिया। श्री भागवत ने कहा कि यद्यपि कोरोना महामारी की पहली लहर के बाद हम गफलत में आ गए जिसकी वजह से तीसरी लहर अधिक भयावह रूप में आई। हम थोड़ी देर से जागे किन्तु कोई बात नहीं। उसकी भरपाई कर आगे बढ़ें। अब अधिक सेवा की जरूरत है तो हम कर रहे हैं। चूंकि संकट बड़ा है इसलिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। इसलिए हमें उन लोगों के साथ भी हाथ बंटाना होगा जो किसी भी सेवा में कार्य में लगे हैं।
धैर्य और संकल्प की दृढ़ता से मिलेगी विजय
उन्होंने कहा कि यह मानवता पर अभूतपूर्व संकट है। महामारी के प्रकोप से होने वाले नुकसान की रोज आने वाली सूचनाओं से नैराश्य और उदासीनता का वातावरण बनता है लेकिन भारतीय समाज हर बाधा को पार कर आगे बढ़ा है, इसका इतिहास गवाह है। धैर्य और संकल्प की दृढ़ता के साथ चुनौती से निपटना है। इसमें स्वयं को सुरक्षित रखकर दूसरों को बचाना है। कोरोना महामारी के चलते अपनों को खोने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए डॉ. भागवत ने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जीवनगाथा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्लेग की महामारी में किशोर वय में अपने माता व पिता को खो दिया था किंतु इससे उन्होंने संयम नहीं खोया अपितु समाज के प्रति निरपेक्ष आत्मीयता का संबंध बनाया।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनााएं
सरसंघचालक ने कोरोना के बारे में अपुष्ट और अर्धसत्य प्रचार की चर्चा करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया और कहा कि बेसिर-पैर की बातों को समाज में मत फैलने दीजिए। उन्होंने खाली बैठने पर ऐतराज करते हुए कहा कि कुछ न कुछ सीखिए, सिखाइए। कुटुंब को प्रशिक्षित कीजिए। शिक्षा में जो विद्यार्थी पिछड़ रहे हैं, वे ज्ञान में न पिछड़ें, यह सुनिश्चित कीजिए। रोजगार से वंचित लोगों की मदद कीजिए। यदि कोई व्यक्ति मिट्टी का मटका बनाकर बेच रहा है, पानी ठंडा करने की मशीन की जगह उसे खरीदए ताकि उसे मदद मिले। हमें अपनी अर्थव्यवस्था को मंद होने से बचाने की तैयारी करनी है। हम धैर्य की परीक्षा में सफल होंगे। मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन के अंत में एक कहावत के माध्यम से कहा कि ‘जीत अंतिम नहीं होती, हार अंत नहीं होती, जरूरी बस इतना है कि हम निरंतर प्रयास करते रहें।

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