Home खास ख़बरें दूसरे राज्यों में शादी के बाद भी मूल निवासी माने जाएंगे कश्मीरी

दूसरे राज्यों में शादी के बाद भी मूल निवासी माने जाएंगे कश्मीरी

11
0
  • जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल प्रशासन का महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय
  • किसी भी राज्य में शादी करने पर पति भी होंगे डोमिसाइल के हकदार

जम्मू। उपराज्यपाल प्रशासन ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने वाली महिला अथवा पुरुष को डोमिसाइल का पात्र मान लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने नए नियम की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके तहत प्रदेश में डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने पर दूसरे राज्य की महिला या पुरुष भी अब डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल कर सरकारी नौकरी के पात्र होंगे।

इससे पूर्व की व्यवस्था में केवल 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहने, निर्धारित अवधि तक प्रदेश में सेवाएं देने और विद्यार्थियों के लिए निर्धारित नियमों के तहत ही डोमिसाइल प्रमाणपत्र का प्रावधान था। मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर डोमिसाइल प्रमाणपत्र नियमों में सातवां क्लॉज जोड़ा है। अधिसूचना के अनुसार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 का प्रयोग कर जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज (डीसेंट्रलाइजेशन एंड रिक्रूटमेंट) एक्ट 2010 की धारा 15 के तहत दिए गए नियमों के तहत सातवां क्लॉज जोड़ा गया है।

डोमिसाइल प्रमाणपत्र नियमों के इस सातवें क्लॉज में स्पाउस आफ डोमिसाइल की श्रेणी जोड़ी गई है। इसमें न तो पति और ना ही पत्नी का जिक्र किया गया है। यानी इस श्रेणी के आवेदक को डोमिसाइल के लिए अपने जीवनसाथी का डोमिसाइल प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र जमा करवाना होगा। ऐसे आवेदकों को तहसीलदार डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। जिला उपायुक्त अपील प्राधिकारी होंगे।

महिलाओं के लिए आ रही थीं दिक्कतें

अनुच्छेद 370 और 35-ए हटने के बावजूद ऐसे मामलों में दिक्कतें आ रही थीं, जिसमें डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने पर भी डोमिसाइल नहीं मिल पा रहा था। दूसरे राज्यों की जो युवतियां शादी करने के बाद जम्मू-कश्मीर में रहती हैं, उनके लिए स्पष्ट नियम नहीं थे। क्योंकि सामान्य मामलों में डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहना अनिवार्य है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों और उनके बच्चों के लिए प्रावधान हैं।

अनुच्छेद 35-ए निर्धारित करता था जम्मू-कश्मीर की नागरिकता

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 35-ए जम्मू-कश्मीर की विधायिका को अपने नागरिक परिभाषित करने का अधिकार देता था। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को रोजगार और संपत्ति के विशेष अधिकार थे। सबसे ज्यादा परेशानी ऐसी महिलाओं को आती थी, जिनकी शादी दूसरे राज्यों में होती थी। उन महिलाओं के बच्चों को जम्मू-कश्मीर में संपत्ति अथवा नौकरी के अधिकार नहीं मिलते थे। अनुच्छेद 370 के साथ अनुच्छेद 35-ए भी खत्म कर दिया गया था, लेकिन कई विसंगतियां अभी भी जारी थीं।

Previous articleरायपुर जिला अस्पताल में दो बच्चें की मौत हाईरिस्क के 37 बच्चे भर्ती, 23 की हालत गंभीर
Next articleपेगासस जासूसी मामले में स्थिति स्पष्ट करे केंद्र सरकार: कमलनाथ

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here