‘Tomb of Sand’ उपन्यास को मिला अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार.!

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स्वदेश डेस्क ( विशाखा धरे ): विश्व साहित्य के मंच पर हिंदी लेखिका गीतांजली श्री के उपन्यास टॉम्ब ऑफ सैंड (Tomb Of Sand) को वर्ष 2022 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरूस्कार मिला है। डेजी रॉकवेल  ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया। दरअसल, गीतांजलि श्री का यह उपन्यास हिंदी में ‘रेत की समाधि’ नाम से प्रकाशित हुआ था। अंग्रेजी भाषा में यह किताब Tomb Of Sand नाम से प्रकाशित हुई। लेखिका गीतांजलि श्री की यह किताब दुनिया की उन 13 किताबों में शामिल थी जिसे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की लिस्ट में शामिल किया गया था।
गीतांजलि अब तक तीन उपन्यास और कई कथा संग्रह भी लिख चुकी हैं।
गीतांजलि मूलत: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहनेवाली हैं।गीतांजलि की उम्र 64 साल है। और वो दिल्ली में रहती है। गीतांजलि की साहित्य कृतियों का अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, सर्बियन और कोरियन भाषाओं में अनुवाद हुआ है। गीतांजलि ने उर्दू की कई साहित्यिक कृतियों का अनुवाद भी किया है।

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खिताब जीतने वाली भारतीय भाषा की पहली किताब

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतनेवाली यह किताब किसी भी भारतीय भाषा की पहली किताब बन गई है। बुकर पुरस्कार जीतने के बाद गीतांजलि श्री ने कहा कि मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था, कभी यह नहीं सोचा था कि मैं अवॉर्ड जीत सकती हूं। मैं खुद को सम्मानित और गौरवांवित महसूस कर रही हुं । उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार से एक अलग तरह की संतुष्टि मिल रही है। उन्होंने बताया कि यह उपन्यास उस दुनिया के लिए शोकगीत है जिसमें हम रहते हैं।

50 हजार पाउंड की राशि

गीतांजलि श्री को बुकर पुरस्कार के तहत 50 हजार पाउंड की राशि मिलेगी। यह राशि इस किताब के अंग्रेजी अनुवादक और गीतंजलि के बीच शेयर की जाएगी। इस किताब की अनुवादक डेजी रॉकवेल अमेरिका के वारमेंट की रहनेवाली हैं।

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