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मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) द्वारा आधुनिक तकनीक से बनाई गई स्वदेशी आईल ड्रिलींग रीग्ग

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अहमदाबाद। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) निजी क्षेत्र की पहली कंपनी है जो आधुनिक तकनीक के साथ तेल और ईंधन निष्कर्षण में इस्तेमाल होने वाले रिग्ग का निर्माण और उपयोग करती है। केन्द्र सरकार के बहुचर्चित मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अनुसार MEIL ने देश में पहली बार इन रिग्ग का निर्माण किया है। इन्हें आधुनिक तकनीक और हाइड्रोलिक सिस्टम के साथ डिजाइन किया गया है। MEIL के उपाध्यक्ष पी. राजेश रेड्डी ने कहा कि 7 अप्रैल को अहमदाबाद, गुजरात में कल्लोल तेल क्षेत्र में ड्रिलिंग अभियान शुरू किया है। 1500 HP की क्षमता वाले यह ड्रिलिंग रिग्ग जमीन की सतह से 4000 मीटर (4 किलोमीटर) गहराई तक तेल कुओं को आसानी से खोद सकती है। MEIL द्वारा बनाये हुए ये रिग्ग 40 वर्षों तक बिना रुकावट काम करेंगे।

2019 में MEIL को 47 ड्रिलिंग रिग्ग का निर्माण करने के लिए 6000 करोड़ रु. का पहला कॉन्ट्रेक्ट मिला। इसके तहत पहली रिग्ग को अहमदाबाद के तेल क्षेत्रों में उपयोग में लाया गया है, शेष 46 रिग्ग निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। कुल रिग्ग में से 20 वर्क ओव्हर रिग्ग है। (इस रिग्ग का उपयोग ड्रिल किए गए कुओं से तेल निकालने के लिए किया जाता है और साथ ही तेल कुओं की उत्पादकता बढ़ाने और तेल कुओं की मरम्मत के लिए भी यह रिग्ग सुविधाजनक हैं। साधारण रिग्ग इस तरह के काम करने के लिए उपयोगी साबित नहीं होते है।) शेष 27 लैंड ड्रिलिंग रिग्ग हैं (लैंड ड्रिलिंग रिग्ग एक अत्याधुनिक मशीन है जो जमीन की सतह से भूमिगत तेल जमा करने के लिए पृथ्वी की परतों को खोदती है। यह 1500 मीटर से 6000 मीटर तक खुदाई कर सकती है, जबकि सामान्य रिग्ग केवल 1000 मीटर तक खुदाई कर सकती हैं।

20 में से 12 रिग्ग 50 MT क्षमता के हैं, 4 रिग्ग 100 MTक्षमता के हैं। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड द्वारा 150 मेट्रिक टन की क्षमता वाले 4 रिग्ग का भी निर्माण किया जा रहा है। 1500HP की क्षमता वाले 2 लैंड ड्रिलिंग रिग्ग बनाए गए हैं और और 1500HP AC VFD की क्षमता वाले 17 रिग्ग निर्माण कार्य पुरा हो गया है। 2000HP क्षमता वाले 6 रिग्ग बनाए गए हैं। 2 और रिग्ग भी 2000 HP क्षमता के साथ डिजाइन किए गए हैं। ये 2000 HP क्षमता के रिग्स 6000 मीटर (6 किलोमीटर) तक ड्रिल कर सकते हैं। इस तरह का रिग्ग उत्पादन भारत में पहली बार हो रहा है।

इसमें से एक रिग्ग ने गुजरात में अपना काम चालू किया है और कुछ ही दिनों में दूसरा रिग्ग भी अपना परिचालन शुरू कर देगा, जिसके लिए प्रारंभिक तैयारी शुरू हो चुकी है। शेष 46 रिग्ग में, 2 रिग्ग आंध्रप्रदेश में राजमंड्री के तेल क्षेत्रों में असेंबली स्टेज में हैं, जबकि शेष रिग्ग को असम, त्रिपुरा और तमिलनाडु में ह्रहृत्रष्ट के तेल क्षेत्रों में उपयोग मे लाया जायेगा।

मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के उपाध्यक्ष श्री पी. राजेश रेड्डी ने कहा कि अहमदाबाद के पास दमासाना गांव में स्थित कल्लोल तेल कुए का ड्रिल देसी तकनीक का उपयोग करके पहली रिग्ग के उपयोग से किया गया। ये बहुत तेजी से ड्रिल करेंगी और बहुत कम बिजली भी खपत होगी। यह रिग्ग प्रगत हाइड्रोलिक और स्वचालित तकनीक से बनाया गया है। यह 1500 HP क्षमता की रिग्ग आसानी से 4000 मीटर तक खोद सकती है और इसके सुरक्षा मानक भी बहुत आधुनिक है।

श्री पी. राजेश रेड्डी ने कहा कि भारत की नवरत्न कंपनियों में से एक ONGC के लिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत उन्नत तकनीक वाली यह रिग्ग की आपुर्ती करना बहुत गर्व की बात है। इससे घरेलू तेल उत्पादन में वृद्धि और आयात को कम करके घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार करने में बहुत ही मददगार साबित होगी। इन आधुनिक तकनीक रिग्ग से ONGC को भी लाभ होगा।

भविष्य में कुओं की ड्रिलिंग उन्नत तकनीक की मदद से MEIL वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू कर देगी। MEIL ने मेक इन इंडिया को अपनी नीति के रूप में अपनाया है। यह तेल और ईंधन निष्कर्षण रिग्ग भारत के लिए एक उम्मीद बन गयी है, जिसके लिए अब तक अपने देश को ज्यादातर अन्य देशों की मशीनरी पर निर्भर रहना पड़ता था। MEIL पूरी तरह से उन्नत तकनीक के साथ रिग्ग का निर्माण कर रहा है जो किसी अन्य विदेशी कंपनी की रिग्स जैसे बेजोड़ हैं। यह केवल MEIL के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश को गर्व कि बात है।

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