सुखी जीवन के लिए निरोग जरूरी, आरोग्य भारती व सक्षम लोग गांव व आंगनबाड़ियों को गोद लें : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री ने आरोग्य भारती के सुवर्ण संस्कार का किया शुभारंभ, बांटी बाल रक्षा किट


भोपाल। मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजधानी के आरोग्य भारती कार्यालय पहुंचकर सुवर्ण संस्कार का शुभारंभ किया और बच्चों को दवा पिलाई। मुख्यमंत्री ने बच्चों को सुपोषण अभियान के तहत इम्यूनिटी बूस्टर माने जाने वाले सुवर्ण प्राशन प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने मौजूद बच्चों को बाल रक्षा किट भी बांटी है। आरोग्य भारती के सुवर्ण संस्कार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत अत्यन्त प्रचीन राष्ट्र है, भीम बेटिका की सिला ही 35 हजार साल पुरानी है।

सुखी जीवन के लिए निरोग जरूरी, लोग कोशिश करें कि बीमार नहीं हों। हमने भी बचपन में शहद चाटी है। शहद चटाने की प्रक्रिया अब गांवों में भी विलुप्त हो रही है। 16 संस्कार में सुवर्ण प्राशन भी संस्कार है, बच्चे बीमार न हों इसलिए ये प्रक्रिया की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों साल पहले ये परंपरा हमारे देश मे चल रही है। आयोग्य भारती इस प्रकिया को आगे बढ़ा रही है। सुवर्ण प्रासन से बच्चों को कुपोषण से बचा सकते हैं। खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज को रिसर्च सेंटर बनाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोग्य भारती और सक्षम लोगों से अपील की है कि वे आंगनबाड़ियों और गांवों को गोद लें।

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सरकर कुपोषण के खिलाफ चला रही अभियान


मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ अभियान मध्य प्रदेश सरकार चला रही है। आंगनबाड़ियों के माध्यम से वह प्रयास प्रारंभ हुए है। मेरा समाज के जिम्मेदार नागरिकों से आग्रह है कि एक आंगनवाड़ी को आप भी गोद ले सकते हैं, ताकि हम वहां सुपोषणयुक्त मध्यप्रदेश को लेकर कई नवीन प्रयोग कर सकें। बच्चे कुपोषित ना हों, स्वस्थ हों, रोग प्रतिरोधक क्षमता उनमें विकसित हो, इसकी कल्पना आज से हजारों साल पहले भारत ने की थी। मैं आरोग्य भारती का धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि उस परंपराओं को आगे बढ़ाने का महान कार्य उन्होंने हाथ में लिया है। मध्य प्रदेश में बच्चों के कुपोषण के खिलाफ कई अभियान संचालित हैं।

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हमारे ऋषि-मुनियों, मनीषियों ने हमेशा यह चिंता की है कि मनुष्य को सुखी रहना है तो निरोग रहना जरुरी है। कोशिश यह हो कि हम बीमारी ना हों। स्वर्ण प्राशन सहित सोलह संस्कार वैज्ञानिक हैं। स्वर्ण प्राशन चटाने का अति महत्व है। जन्म से लेकर 16 साल की आयु तक अभिभावक बच्चों में इसका उपयोग करते हैं।

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