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प्रदेश में आज से खुलेंगे महाविद्यालय, प्राथमिक कक्षाएं 20 से

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  • कोरोना के कारण करीब डेढ़ साल से बंद हैं प्राथमिक शालाएं
  • चिकित्सा महाविद्यालयों में हिंदी में होगी पढ़ाई
  • कॉलेज में प्रवेश के लिए टीकाकरण प्रमाण पत्र जरूरी
  • 50 प्रतिशत क्षमता के साथ लगेंगी प्राथमिक की कक्षाएं


स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

कोरोना महामारी के कारण लगभग डेढ़ साल से बंद प्रदेश में अब लगभग सभी शैक्षणिक संस्थाएं खुलना शुरू हो गई हैं। प्रदेश में कॉलेज कल से खुलेंगे। इनमें प्रवेश टीकाकरण की कम से कम पहली खुराक लेने का प्रमाण दिखाने के बाद ही मिलेगा। इसी तरह हाईस्कूल व हायर सेकेंड्री स्कूलों की तर्ज पर प्राथमिक कक्षाएं भी आगामी 20 सितंबर से 50 प्रतिशत क्षमता के साथ शुरू होंगी।

इधर, हिन्दी दिवस पर राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा अब हिंदी में देने का निर्णय लिया है। शिक्षा से जुड़े यह तीनों महत्वपूर्ण निर्णय मंगलवार को लिए गए। बात पहले महाविद्यालयीन शिक्षा की। उच्च शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा कि प्रदेश में सभी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां 15 सितंबर से 50 प्रतिशत विद्यार्थियों की भौतिक उपस्थिति के साथ प्रारंभ होंगी। लेकिन स्टॉफ की उपस्थिति शत-प्रतिशत रहेगी।

सभी के लिए टीकाकरण के कम से कम एक डोज लिए जाने का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। कक्षा एवं संस्था परिसर में कोविड-19 के सुरक्षा मानकों क ा पालन करना होगा। विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने पर अलग-अलग समूह बनाकर प्रायोगिक एवं शैक्षणिक कार्य किए जा सकेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन कक्षाएं भी पूर्ववत जारी रहेंगी। संस्थाएं खुलने से पूर्व इनमें जरूरी सफाई एवं सैनिटाइजेशन किया जाएगा।

अभिभावकों की अनुमति जरूरी

स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एक आदेश जारी कर प्रदेश की सभी शासकीय,अशासकीय प्रायमरी शिक्षण संस्थाओं में कक्षाएं आगामी 20 सितंबर से शुरू करने की अनुमति दी है। अन्य स्कूली कक्षाओं की तरह छोटे बच्चों की ये कक्षाएं भी 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति के साथ ही शुरू हो सकेंगी। बच्चों के स्कूल आने के लिए उनके अभिभावकों की अनुमति तथा जिला आपदा प्रबंध समिति की सहमति जरूरी होगी। छात्रावास व आवासीय विद्यालय भी इन्हीं शर्तों पर शुरू हो सकेंगे। कोविड नियमों व अन्य एसओपी का पालन अनिवार्य होगा। ऑनलाइन कक्षाएं व डिजिटल माध्यम से शिक्षण व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी।

चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में

इधर, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मंगलवार को हिंदी दिवस के मौके पर कहा कि प्रदेश में अब मेडिकल छात्रों को हिन्दी में पढ़ाया जाएगा। पूरा पाठ्यक्रम हिन्दी में ही होगा। जल्द ही इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। यह एक मॉड्यूल तैयार करेगी। इसके सुझाव के आधार पर ही पूरा पाठ्यक्रम हिन्दी में तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी इसके लिए समय सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन हमारा प्रयास रहेगा कि कम समय में इसे शुरू करें। इससे छात्रों को चिकित्सा शिक्षा लेने में आसानी होगी।

बीए में रामचरितमानस पाठ्यक्रम

ज्ञात हो कि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दिन पहले प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेज में रामचरितमानस नाम से नया पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। पहले चरण में इसे बीए प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। डॉ. यादव ने कहा था कि इसी कक्षा में मौजूदा शिक्षण सत्र से उर्दू गजल को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

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