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बच्चे को गोद लेने के दो साल बाद ही ले जा सकेंगे विदेश

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  • बेसहारा बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया होगी सरल

उमेश कुमार, नई दिल्ली

मोदी सरकार बेसहारा बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया सरल बनाएगी। केंद्रीय बाल व महिला विकास मंत्रालय ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। इससे बच्चों को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद विदेश ले जाने की इजाजत मिलेगी। सरकार की इस कवायद से बेसहारा बच्चों को गोद लेने वाले माता—पिता को काफी सहुलियत मिलेगी और वह इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय बाल व महिला विकास मंत्रालय ने माना है कि बेसहारा बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया जटिल है। इस प्रक्रिया को सरल बनाने से बहुत सारे बेसहारा बच्चों को घर व माता—पिता का प्यार हासिल हो पाएगा। इस बाबत मंत्रालय में आज बैठक हुई। इसमें यह तय हुआ कि बेसहारा बच्चों को गोद लेने के नियमों में बदलाव किया जाए। पहले बेसहारा बच्चों को गोद लेने के बाद दो साल तक उसे बाहर नहीं ले जा सकने का प्रावधान था। इससे विदेश में रहने वाले लोगों द्वारा बच्चों को गोद लेने में कठिनाई आती थी।

बच्चा गोद लेने के बाद उसके दो साल तक उसी शहर में रहना पड़ता था या फिर बच्चों के लिए रहने और देखभाल का प्रावधान करना पड़ता था। इसकी वजह से गोद लेने की उनकी इच्छाएं दबी रह जाती थी। सरकार ने माना है कि बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रावधान में थोड़ी ढिलाई की जरूरत है। इस बाबत यह तय हुआ कि दो साल वाले प्रावधान में कुछ संशोधन किया जाए। इसके बाद मंत्रालय ने तय किया कि गोद लेने के बाद माता—पिता उसे बाहर ले जा सकते हैं। लेकिन दो सालों तक उन्हें दूतावास या उच्चायुक्त के संपर्क में रहना होगा। उन्हें लगातार बच्चों के बारे में दूतावास या उच्चायुक्त को सूचना देनी होगी।

विदेश मंत्रालय की भी होगी भूमिका

गोद लेने की प्रक्रिया में होने वाले बदलाव में विदेश मंत्रालय की भी भूमिका तय की जा रही है। विदेश मंत्रालय अपने उच्चायुक्तों और दूतावासों के माध्यम से गोद लिए हुए बच्चों की निगरानी का काम करेगा।

बेसहारा बच्चों को गोद लेने में घटती जा रही दिलचस्पी

देश में बेसहारा बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन इसको गोद लेने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। देश के अंदर ही नहीं विदेश में बसे भारतीय लोग भी अब बेसहारा बच्चों को गोद लेने में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आंकड़े इसकी गवाह है। कारा के मुताबिक 2010 में भारत के अंदर 5,693 बेसहारा बच्चों को गोद लिया गया। जबकि विदेश में बसे भारतीयों द्वारा 628 बेसहारा बच्चों को गोद लिया गया। 2020—2021 में यह घटकर क्रमश: 3,142 और 417 हो गया है।

बेसहारा बच्चों को गोद लेने में लोगों की दिलचस्पी कम होती देख इसके नियमों में बदलाव की जरूरत महसूस होने लगी है। बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों में ढिलाई की कवायद बाल व महिला विकास मंत्रालय की ओर से शुरू हो गया है। शीघ्र ही इस कवायद को अमलीजामा पहनाया जाएगा।

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