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पंजाब में अमरिंदर सरकार पर मंडराया खतरा, सभी विधायक दिल्ली तलब

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  • पंजाब कांग्रेस में बनी दो फाड़ की स्थिति
  • सिद्धु व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सहित कई विधायकों ने कैप्टन के खिलाफ खोला मोर्चा

नई दिल्ली ब्यूरो

कांग्रेस में बगावतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ बगावत की शोर अभी थमी नहीं है। वहीं राजस्थान और पंजाब में बगावत के सुर फिर से जोर पकड़ ली है। राजस्थान में आग—आग अंदर ही अंदर सुलग रही है तो पंजाब में चिंगारी फूटने लगी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावती सुर इतने तेज हो गए कि पार्टी आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा है। आलाकमान ने सभी विधायकों को दिल्ली तलब किया है।
पंजाब कांग्रेस में दो फाड़ की स्थिति बन गई है।

कैप्टन के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धु ने मोर्चा खोल रखा है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी कैप्टन के कामों पर उंगली उठा कर सिद्धु के विरोध को मजबूत कर दिया है। कांग्रेस के करीब दो दर्जन विधायक जिसमें प्रदेश अध्यक्ष सुनील झाखड़, मंत्री चरणजीत चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा भी शामिल हैं, सभी दिल्ली पहुंच गए हैं। जबकि नवजोत सिंह सिद्धु पहले से ही दिल्ली में डेरा जमाए बैठे हैं। चुनाव में कांग्रेस द्वारा किए गए वादों को पूरा ना करने के आरोप के बाद कांग्रेस विधायकों ने अपनी सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

कहा जा रहा है कि कैप्टन का विरोध करने वाले गुटो को राहुल गांधी का मौन समर्थन प्राप्त है। यही वजह है कि पंजाब में गुटबाजी को लेकर राहुल गांधी कुछ नहीं बोल रहे है। जबकि आलाकमान ने पंजाब की बगावत को शांत करने के लिए तीन नामों का पैनल बना रखा है। इस पैनल की अगुवाई हरीश रावत कर रहे हैं। उनके अलावा मल्लिकार्जुन खडग़े और जेपी अग्रवाल भी इस पैनल में हैं। समिति तीन चरणों में बातचीत करेगी। पहले चरण में विधायकों से बात होगी। दूसरे में सांसदों और अंत में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ बैठक होगी। सनद रहे कि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पूर्व पार्टी में गुटबाजी से कांग्रेस आलाकमान हलकान है।

राजस्थान कांग्रेस में कभी भी फूट सकता गुटबाजी बम

राजस्थान में कांग्रेस की गुटबाजी से एक बार सत्ता खतरे में पड़ गई थी। सचिन पायलट गुट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी को हिला दिया था। बड़ी मुश्किल से इस बगावत को शांत कर सत्ता को बचाया जा सका। कुछ दिनों से पायलट गुट फिर से मुखर होने लगा है। हेमाराम चौधरी का इस्तीफा इसी सुगबुगाहट की झलक है। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अगर समय पर नहीं जागा तो राजस्थान में एक बार फिर से गहलोत सरकार खतरे में पड़ सकती है।

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