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हमारे खिलाफ नहीं हो अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल

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अफगानिस्तान से निकलने वाले अंतिम अमेरिकी सैनिक कमांडर मेजर जनरल क्रिस डोनह्यू। रात में विमान में चढ़ते वक्त नाइट विजन कैमरे से लिया गया चित्र।
  • दोहा में पहली बार तालिबान से बात, भारत ने कहा

एजेंसी, काबुल/नई दिल्ली।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने तालिबान से बातचीत की है। यह पहली बार है जब तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने के बाद भारत ने आधिकारिक तौर पर तालिबान से बातचीत की है। बातचीत अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों की सकुशल वापसी और अफगानिस्तान को लेकर भारत की चिंताओं पर केंद्रित रही।

विदेश मंत्रालय ने बताया है कि मंगलवार को कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने तालिबान के दोहा राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तनेकजई से मुलाकात की है। भारत ने कहा है कि बातचीत तालिबान के अनुरोध पर दोहा स्थित भारतीय दूतावास में हुई है। अफगानिस्तान में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी भारत वापसी पर चर्चा केंद्रित रही है।

राजदूत मित्तल ने इस बात पर चिंता जताई है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत के इन मसलों को लेकर शेर मोहम्मद अब्बास स्तनेकजई ने आश्वासन दिया है कि इन मुद्दों को सकारात्मक नजरिए से संबोधित किया जाएगा।

बता दें कि हालिया दिनों में तालिबान नेताओं ने कई बार कहा है कि भारत इस क्षेत्र का अहम देश है और हम भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं। तालिबान ने अफगानिस्तान में भारतीय निवेश का स्वागत किया है और कहा है भारत अफगानिस्तान में प्रोजेक्ट पर काम करना जारी रख सकता है। तालिबान ने लगातार दावा किया है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं किया जाएगा।

बातचीत में कतर की भूमिका अहम

अफगानिस्तान में स्थिति को लेकर भारत और कतर लगातार संपर्क में रहे हैं। कतर के विशेष राजदूत मुतलक बिन माजिद अल-कहतानी इसी महीने दिल्ली आए थे। उन्होंने भारत को अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के लिए कतर बुलाया था। तालिबान का इकलौता राजनीतिक दफ्तर 2013 से कतर में ही है।

अमेरिकी ने 24 घंटे पहले छोड़ा अफगानिस्तान

तालिबान से हुए समझौते के तहत अमेरिकी सेना को 31 अगस्त तक अफगानिस्तान छोडऩा था, लेकिन अमेरिकी सैनिकों से तय समय से 24 घंटे पहले 30-31 अगस्त की दरमियानी रात 12 बजते ही काबुल एयरपोर्ट का नियंत्रण छोड़कर अपने देश को रवाना हो गए हैं। अमेरिकी सैनिकों द्वारा काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट को खाली करने के बाद तालिबानी लड़ाकों ने जमकर फायरिंग कर जश्न मनाया। इसके तत्काल बाद तालिबान ने कहा कि उसके स्पेशल फोर्स बदरी-313 ने काबुल हवाई अड्डे की सुरक्षा की कमान संभाल ली है। उधर अमेरिकी सेना के जनरल मैकेंजी ने अमेरिका में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह वापसी की घोषणा कर दी।

काबुल में रखे 73 विमान खराब कर गई अमेरिकी सेना

अमेरिकी सेना ने सोमवार रात को अफगानिस्तान छोड़ दिया। उसके जाते ही तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया, लेकिन यहां रखे विमानों को तालिबान कभी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिकी सेना इन विमानों को निष्क्रिय कर गई है। सेंट्रल कमांड के हेड जेनरल केनेथ मैकेंजी ने कहा कि 73 एयरक्राफ्ट जो हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रखे हैं, उन्हें डिसेबल कर दिया गया है। मैकेंजी ने कहा- ये विमान अब कभी नहीं उड़ेंगे… इन्हें कभी कोई संचालित नहीं कर पाएगा। हालांकि इनमें से ज्यादातर विमान मिशन के लिहाज से नहीं बनाए गए थे, लेकिन फिर भी इन्हें कभी कोई उड़ा नहीं सकेगा।

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