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आप ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस से मांगा 30 सीट, प्रदेश इकाई एक भी सीट देने को नहीं राजी

आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए विपक्ष एकजुट होने की कवायद में जुटा हुआ है। लेकिन इस कवायद को अंजाम पर पहुंचने से पहले ही बिखराव के बीज पनपने लगे  हैं। आम चुनाव से पहले होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्षी एकता में शामिल दलों ने कांग्रेस के सामने अभी से मजबूत दावेदारी थोंप दी है। जोकि कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं है। कांग्रेस हरगिज इन दलों द्वारा की गई सीटों की मांग को स्वीकार नहीं करेगी।

विपक्षी एकता की इसी दावेदारी पर मुहर लगाने के लिए आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन करने की शर्त रख दी है। सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन के लिए 30 सीट की मांग रखी है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्यों में किसी भी सहयोगी के लिए एक सीट भी छोड़ने का राजी नहीं है। कांग्रेस के इस रूख के बाद विपक्षी एकता खटाई में पड़ता दिख रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि विपक्षी एकता की बात इस साल के नवंबर—दिसंबर तक हवा में तैरती रहेगी। जैसे ही चुनाव का एलान होगा, सभी एकता धरी की धरी रह जाएगी, जो पुराना गठबंधन है, केवल वही काम करेगा, बाकी सब हवा—हवाई की बातें रह जाएंगी।

कर्नाटक चुनाव के बाद होगा विपक्षी एकता को लेकर बैठक

विपक्षी एकता को लेकर 19 दलों की बैठक कर्नाटक चुनाव के बाद होगा। कर्नाटक चुनाव परिणाम इस एकता के भविष्य को लेकर भी लाइन खींचने का काम करेगा। कांग्रेस को इस एकता में कितना तवज्जों मिलेगी, यह चुनाव परिणाम से ही तय होगा।

पीके फार्मूले पर ममता तैयार

प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को लोकसभा की उन 200 सीटों पर लड़ने को कहा है जिस पर पार्टी मजबूत स्थिति में है। बाकी के सीट विपक्ष की उन पार्टियों को राज्य अनुसार छोड़ने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के सामने यह रणनीति रखी थी। जिसे कांग्रेस ने एक सिरे से खारिज कर दिया था। विपक्षी एकता की बात चलने पर तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी भी इसी फार्मूले को सामने ला रही है। ममता बनर्जी के अनुसार कांग्रेस पश्चिम बंगाल में केवल 2 सीट पर चुनाव लड़े और बाकी की 40 सीट तृणमूल के लिए छोड़ दे। ऐसे ही सभी राज्यों में जहां जो पार्टी ताकतवर है कांग्रेस उसके लिए छोड़ दे। पर कांग्रेस इस पर कतई तैयार नहीं है।

कांग्रेस अधिकतम 450 सीट और न्यूनतम 390 सीट पर लड़ चुकी चुनाव

कांग्रेस अब तक हुए आम चुनावों में अधिकतम 450 सीट और न्यूनतम 390 सीट पर चुनाव लड़ी है। कांग्रेस 200 सीट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं होगी। कांग्रेस यह मानती है कि अगर वह 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो कई राज्यों में पार्टी का झंडा—बैनर उठाने वाला तक नहीं बचेगा।

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