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सड़क हादसा: ग्वालियर में बस-ऑटो की भिड़ंत में 13 लोगों की मौत; इनमें 12 महिलाएं, जो आंगनबाड़ी में खाना बनाकर लौट रही थीं

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मंगलवार सुबह ऑटो और बस की आमने-सामने से हुई टक्कर में 13 लोगों की मौत हो गई। इनमें ऑटो ड्राइवर और इसमें बैठी 12 महिलाएं शामिल हैं। सभी महिलाएं रात को आंगनबाड़ी में स्कूली बच्चों के लिए खाना बनाकर लौट रही थीं। 9 महिलाओं और ऑटो ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई। तीन महिलाओं को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें भी मृत घोषित कर दिया गया।
ऑटो ग्वालियर से मुरैना रोड पर चमन पार्क की तरफ जा रहा था, जबकि बस मुरैना से ग्वालियर आ रही थी। हादसा आनंदपुर ट्रस्ट अस्पताल के सामने हुआ। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुरानी छावनी थाने की पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है। मृतकों में से 9 की पहचान हो गई है। सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। इस मामले में ग्वालियर RTO एपीएस चौहान को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं।

परिजन ने 10 लाख रु. मुआवजा और नौकरी मांगी

हादसे के बाद शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया। पीएम के बाद शवों को एंबुलेंस में रखते ही लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। शव वाहन के ड्राइवर को मारकर भगा दिया। लोगों की मांग थी कि मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा, नौकरी और बच्चों को उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई मुफ्त में दी जाए। मौके पर कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक और सतीश सिकरवार भी मौके पर पहुंच गए। नेताओं ने कहा कि मृतकों के सीधी बस हादसे में 7-7 लाख रुपए दिए गए थे, इसी तरह से यहां पर भी मदद दी जाए। इसके बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि परिजनों को सीधी हादसे में जैसी मदद दी जाएगी। इसके बाद शव जाने दिया गया। सरकार ने चार-चार लाख रु. देने की घोषणा की हुई है।


मौत ने सभी को दो की जगह एक ऑटो में किया


चश्मदीदों ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाली सभी 12 महिलाएं दो ऑटो से लौट रही थीं। इनमें से एक ऑटो में सिर्फ 3 सवारी बैठाने की कैपेसिटी थी, लेकिन 6 बैठाई गई थीं। रास्ते में एक ऑटो खराब हो गया। तब इसमें बैठी 6 महिलाएं साथ चल रहे दूसरे ऑटो में बैठ गईं। इस तरह एक ही ऑटो में 12 सवारी हो गईं। उन्होंने तय किया था कि पुरानी छावनी से दूसरा ऑटो कर लेंगे, लेकिन शायद मौत ने ही उन्हें एक ऑटो में किया था।

मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए देगी सरकार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे पर दुख जताया है। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए की मदद देने का ऐलान किया है।

तीन बच्चे हो गए बे-सहारा, अब वृद्ध नानी के भरोसे- लक्ष्‍मी पत्‍नी दिनेश

लक्ष्मी पत्नी दिनेश निवासी जडेरुआ के तीन बच्चे हैं। रोहित, पूजा व वरूण है। तीनों अभी छोटे हैं। पिता ड्राइवरी करता है। कुछ समय पहले पति ने आत्महत्या कर ली। पिता की मौत के बाद बच्चों के लालन-पालन का जिम्मेदार लक्ष्मी कर उठा रही थी। यहां किराये के मकान में रहती थी। रात को मौसम खराब होने के कारण बच्चों ने मां को रोकने का प्रयास किया था। बच्चों के मुंह से निकला था। आज मम्मी तुम मत जाओ न जाने क्या हो जाए। बच्चे के पेट भरने के मजबूरी के चलते वह छोटी बहन व बच्चों के साथ रोकने के बाद चली गई। अब बच्चे वृद्ध नानी मीरा के भरोसे हैं। नानी मुरैना में रहती है। वह मेहनत मजदूरी करती है।

दो बच्चे हुए अनाथ,पिता की पहले ही मौत हो गई- राजेंद्री पत्नी प्रकाश बघेल निवासी जड़ेरूआ

मृतिका के पति प्रकाश बघेल ड्राइवर था। पांच साल पहले पति की मौत हो चुकी है। राजेंद्री बाई के दो बेटे सतीश व करन हैं। सतीश 12 वीं पढ़ता है, करन 11 वीं का छात्र है। पिता की मौत के बाद राजेंद्री बाई ही मेहनत मजदूरी कर दोनों बेटों की परवरिश करते हुए पढ़ा- लिखा रही थी। इन्ही बच्चों के लिए प्रति सोमवार वह पूड़ी बनाने के लिए जाती थी। इन बच्चों के सिर से पहले पिता का अब मां का भी साया उठ गया। दोनों बच्चे बेसहारा हो गए।

2- 15 साल की बेटी के हाथ पीले करने के लिए मजदूरी करनी जाती थी- ऊषा पत्‍नी कोमल जाटव

ऊषा पत्नी कोमल जाटव निवासी जेडरूआ का पति भी पुुताई का काम करता है। ऊषा के 15 साल की बेटी वर्षा के अलावा दो बेटे छोटे बेटे संजय व राज हैं। बेटी बड़ी होने के कारण उसके हाथ पीले करने के लिए बेटी के हाथ पीले करने की चिंता सता रही थी। पति कोमल को भी महीने में 10 दिन मजदूरी मिलती थी। इसलिए ऊषा मेहनत मजदूरी कर बेटे की शादी के लिए पैसा जमा करने के साथ बच्चों का पेट भर रही थी। पति का कहना है कि अब कौन मेरे घर को देखेगा।

तीन बच्चों के सिर से उठ गया मां का साया

बि्ट्ट बाई पत्नी मचल सिंह निवासी जडेरूआ के तीन बच्चे हैं। मनीष पाल, अनिल पाल व सुनील पाल पति मचल सिंह पुट्टी का काम करता है। घर चलाने के लिए बिट्टी बाई मजदूरी करती है। अब इन बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। बड़ा बेटा आइटीआइ कर रहा है। छोटा बेटा भी पढ़ रहा है। मझले बेटे सुनील को ट्रक पर क्नीलरी करने के लिए भेज दिय। वह पिता के दोस्त के साथ ट्रक लेकर मुंबई गया है। 15 दिन पहले ही जिठानी की मौत हुई है।

अब घर से कैसे चलेगा

मुन्नाीपाल पत्नी परशुराम निवासी पिंटो पार्क के दो बेटे हैं। रामनिवास व अतर सिंह है। घर चलाने के लिए मुन्नाीपाल मजदूरी करने के लिए जाती थी। मुन्नाी की मौत के बाद घर कैसे चलेगा।

शादी के बाद बड़ी बेटी की जिम्मेदारी उठा रहे थे वृद्धा माया

माया पत्नी राम अवतार प्रजापति की उम्र 60 से 65 वर्ष के लगभग थी। पति की पहले ही मौत हो चुकी है। मृतिका के दो बेटी ओमवती व पार्वती है। दोनों बेटियों के हाथ पीले कर दिए, लेकिन बड़ी बेटी ओमवती पति व बच्चों के साथ मां के पास रहती है। पार्वती अपनी ससुराल में रहती है। दो महीने पहले पर्वती ने बच्चे को जन्म दिया है। बड़ी बेटी का परिवार चलानेके लिए माया प्रजापति मजदूरी करने के लिए जाती थी।

बच्चों को परेशानी नहीं हो, इसलिए वृद्धा हरज्ञो बाई मजदूरी करनी जाती थी

पिटो पार्क पर मितेंद्र दर्शन सिंह के खाली पड़े प्लाट में झोपड़ी बनाकर रहनी वाली 65 साल की हरज्ञो बाई पत्नी बाबू लाल बाथम के दो बेटे हैं। महेश व छोटू की दोनों की शादी हो गई है। दोनों मां के साथ में रहते हैं। बड़ा बेटा महेश कांग्रेसी नेता मितेंद्र के पेट्रोल पंप पर काम करता है। छोटा बेटा बिजली का काम करता है। घर चलाने में दोनों बच्चों को कोई परेशानी नहीं हुई। इसलिए वृद्धा मजदूरी करने के लिए जाती थी।

बच्चों की परवरिश के लिए मजदूरी करती थी


शिवकालोनी पिंटा पार्क निवासी ऊषा पत्नी गिर्राज राठौर के दो बेटे चंदन राठौर, अजय राठौर व एक बेटी है। प्रीति है। बच्चों की परवरिश के लिए ऊषा मजदूरी करती थी। नंद व भतीजी के सात मजदूरी करने के लिए गई थी।

अपना पेट भरने के लिए मजदूरी करती थी

शिवकालोनी में निवास करने वाली कमला पत्नी रामदास राठौर अपना पेट भरने के लिए मजदूरी करती थी। पति का पहले ही देंहात हो चुका है।

पति गुजरात में नौकरी करता है, बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए मजदूरी करने गई थी

शिवकालोनी पिंटो पार्क निवासी गीता पत्नी बंटी राठौर के तीन बच्चे हैं। राजू, शिवानी व प्रिंस राठौर है। पति बंटी सोन पपड़ी बनाने वाली फैक्ट्री में नौकरी करने गुजरात गया है। तीनों बच्चों की अच्छी परवरिश करने के लिए दो अन्य रिश्तेदारं के साथ गीता मजदूरी करने के लिए गए थे। पति अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाया।

दो बच्चे हो गए बेसहारा

जडेरूआ गांव में निवास करने वाला धर्मेंद्र पुत्र हरदयाल मूल रूप से सियारी जालौन यूपी का रहने वाला है। माता-पिता व भाई जालौन में रहते हैं। धर्मेंद्र यहां पत्नी सोनू परिहार के साथ रहता था। उसके दो बच्चे 6 साल की स्नेहा व चार का ढोलू है। पहले फैक्ट्री में नौकरी करता था। क्षेत्र की लोगों की मदद से आटो फाइनेंस करा ली। अब आटो चलाता था। उसी के पास मजदूर महिलाओं को स्टोन पार्क ले जाने व लाने का ठेका था। सोनू परिहार पति के मौत की खबर सुनकर अचेत पड़ी थी। बच्चे इस बात से बेखबर थे, उनके पिता का देंहात हो चुका है। वे घर के बाहर खेल रहे थे। पड़ोसी शव आने का इंतजार कर रहे थे। अंतिम यात्रा में परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।

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