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चीन व पाक के साथ बढ़ते तनाव : अमित शाह ने डोभाल और अन्य अफसरों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक

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नई दिल्ली। देश की सुरक्षा के मुद्दे और चीन व पाक के साथ बढ़ते तनाव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अपने नार्थ ब्लाक कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, गृह सचिव अजय भल्ला और इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख अरविंद कुमार के साथ एक सुरक्षा शामिल रहे। बैठक में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के प्रमुख कुलदीप सिंह और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक पंकज सिंह भी शामिल थे। यह बैठक करीब 2.45 घंटे तक चली।

ज्ञात हो कि पूर्वी लद्दाख में चीन की तरफ से सेना की तैनाती बढ़ा दी है। सतर्कता बरतते हुए भारत ने भी अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ के-9 वज्र तोपें तैनात कर दी हैं। इस बीच, भारत-चीन के बीच लंबित मुद्दों के बातचीत से समाधान की उम्मीद जताते हुए थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की आरे से बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि एलएसी पर चीन ने पहले भी तैनाती बढ़ाई थी, जिसके बाद भारत ने भी सेना की तैनाती बढ़ाने के साथ ढांचा खड़ा किया था। यह ठीक नहीं है कि कोई फिर से आक्रमक रुख अपनाए।

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ बढ़ी

उधर, अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ बढ़ गई है। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद यह पहला मौका है, जब कश्मीर में आतंकी घुसपैठ में तेजी आई है। ईयू टुडे ने निक्केई एशिया के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकी पाकिस्तानी संगठन जैश-ए-मुहम्मद व लश्कर ए तैयबा से जुड़े हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक ये आतंकी अब तक अफगानिस्तान में तालिबान और उसके एक गुट हक्कानी नेटवर्क के लिए लड़ रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई से करीब 50 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसे और अभी सक्रिय हैं। ये आतंकी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत व अफगानिस्तान के सीमावर्ती जनजातीय इलाकों से ताल्लुक रखते हैं।

सेना और स्थानीय पुलिस का ध्यान इस ओर भी है। इसका मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत कम से कम 12 आतंकी संगठनों के लिए पनाहगाह बना हुआ है। भारत तमाम मंचों से आवाज उठा रहा है कि अफगानिस्तान आतंकी संगठनों का नया पनाहगाह न बने।

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