Home अमृत महोत्सव सहजता दिव्य आभूषण, विद्वता मोर मुकुट

सहजता दिव्य आभूषण, विद्वता मोर मुकुट

22
0

जन्म के साथ उम्र का सफऱ ही जीवन कहलाता है। आपका जीवन कितनी उम्र तक पहुँचा, इससे अधिक प्रभाव इस अर्थ का होता है कि कैसे पहुँचा अर्थात् आपने अपने जीवन की कहानी गढ़ी या नही। राजेन्द्रजी का जीवन, कर्म, व्यवहार और वाणी सभी धीर वीर और गम्भीर हैं। ‘हमारी आवाज़’ से ‘स्वदेश’ की वर्तमान संस्थापना तक आप समाज, राष्ट्र और मानवता की सतत सेवा में समर्पित रहे हैं।

सहजता और सरलता आपके जीवन का दिव्य आभूषण है और विद्वता मोर मुकुट की तरह शोभायमान रहा है। सनातन संस्कृति की पताका लहराते हुए आप निर्भीकता के साथ गतिशील रहे। वैभवता के अनेक प्रलोभन से दूर आपने त्यागभाव से सतोगुणी जीवन को आत्मसात् किया। इसका प्रभाव आपके पारिवारिक जीवन में भी परिलक्षित होता है।

स्पष्टवादिता के शुभ्र गुणों से युक्त आपका व्यक्तित्व सदैव तेजस्वी रहा है। अनेक विभूति और दिव्य व्यक्तित्व का सत्संग आपके जीवन को परम पुरुषार्थी बनाता चला गया। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि आपसे जो मिला, आपके चुम्बकीय व्यक्तित्व ने उसे अपना बना लिया। राजेन्द्रजी का व्यक्तित्व ऐसा है कि उनके घोर विरोधी भी पीठ पीछे उनकी प्रशंसा करते हैं। रघुनाथजी प्रार्थना है कि आप सौ वर्षों तक ऐसे ही समाज, धर्म, राष्ट्र और मानवता की सेवा करते रहें।

  • डॉ प. सुरेंद्र बिहारी , पूर्व अध्यक्ष, मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी
Previous articleपत्रकारिता की उजली परंपरा के वाहक: ‘स्वदेश कुल’ की वैचारिक पत्रकारिता के ‘कुलपति’ हैं राजेन्द्र शर्मा
Next articleमामाजी के प्रतिबिंब हैं राजेन्द्रजी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here