Home अमृत महोत्सव मामाजी के प्रतिबिंब हैं राजेन्द्रजी

मामाजी के प्रतिबिंब हैं राजेन्द्रजी

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पत्रकारिता के शिखर पुरुष एवं सादगी, सरलता और निश्छलता के पर्याय श्रद्धेय माणिक चंद्र बाजपेयी (मामाजी) की छत्र छांव एवं सानिध्य में पले बढ़े आदरणीय राजेन्द्र शर्मा जी उन विरले पत्रकारों में शामिल हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को देश, समाज और राष्ट्रीय विचार की सेवा का माध्यम बनाया और सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर उन्होंने सदैव समाज को जागरूक किया।

मूल्य आधारित, निष्कलंक, निष्पक्ष और निर्भीकता के साथ समाज को दिशा और मार्गदर्शन देने वाली पत्रकारिता की श्री राजेन्द्र शर्मा जी मिशाल हैं। वह पूरी तरह से श्रद्धेय माणिकचंद्र मामाजी का ही प्रतिबिंब है। उन्होंने पत्रकारिता में जो आदर्श स्थापित किया है, उसका आज के पत्रकारों को अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने अनासक्त भाव से यानि नि:स्वार्थ भाव से कार्य किया है।

इस तरह के महान व्यक्ति किसी के पीछे नहीं चलते, बल्कि लोग उनके पीछे चलते हैं। वर्ष 1990 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जिम्मेदारी मिलने के बाद मेरा केंद्र भोपाल ही था, विद्यार्थी परिषद में प्रांत मंत्री एवं प्रांत प्रमुख के नाते काफी समय तक भोपाल में रहना हुआ। उस समय अक्सर श्रद्धेय मामाजी से मिलने जाते थे, उसी दौरान आदरणीय राजेंद्र जी से भी मिलना होता रहा है। उस समय आप विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष थे।

उनके पुत्र अक्षत और पुत्री रोली के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य के रूप में मुझे भी आपका आशीष मिलता रहा है। 92-93 में स्वदेशी जागरण मंच के गठन के बाद मुझे नई जिम्मेदारी प्रांत संयोजक के नाते मेरा केंद्र भोपाल ही था। उनके पुत्र अक्षत से मित्रवत संबंध रहे। 2001 में मुझे दीनदयाल शोध संस्थान में भारत रत्न नानाजी देशमुख के सानिध्य में काम करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। उस समय में नानाजी के साथ चित्रकूट में ही था। उस दौरान राजेंद्र जी भी चित्रकूट आए थे, उनके बेटे अक्षत भी साथ में थे।

  • अभय महाजन, संगठन सचिव दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट
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