Home स्थापना दिवस शहर के दो धार्मिक स्थल लालघाटी और करुणाधाम आश्रम

शहर के दो धार्मिक स्थल लालघाटी और करुणाधाम आश्रम

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  • आस्था के साथ -साथ समाज सेवा के भी हैं पर्याय

भगवान भोलेनाथ विराजे हैं। यह मान्यता है कि जो भी भक्त यहां आता है उसकी हर मनोकामना बाबा भोले पूरी करते हैं। इसीलिए यहां सावन मास तथा शिवरात्रि पर भारी भीड़ पहुंचती है। शहर के लोग बताते हैं कि भगवान शिव की पिंडी स्थापना को कोई लिखित प्रमाण नहीं है लेकिन फिर भी मंदिर के प्रति वर्षों से लोगों के मन मे ंश्रद्धा है।

  • दीपक पगारे।

हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश की राजधानी यूं तो कई मायनों में जानी जाती है, लेकिन आस्था और आध्यात्मिकता की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। यहां के अनेक धार्मिक स्थान देश भर में जाने जाते हैं। लेकिन शहर के दो प्रसिद्ध मंदिर सारे शहर की आस्था का केन्द्र हैं। वे हैं गुफा मंदिर और करुणाधाम आश्रम मंदिर। इन दोनों ही मंदिरों की विशेषता यह है कि यह आस्था केन्द्र के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं। संत नगर बैरागढ़ और पुराने भोपाल के बीच लालघाटी के पास स्थित गुफा मंदिर में ‘महादेव विराजे हैं। सात प्राकृतिक गुफाओं का यह मंदिर अपने भीतर कई रहस्य भी समेटे है। इनमें से एक गुफा के प्राकृतिक जल में भगवान भोलेनाथ विराजे हैं।

यह मान्यता है कि जो भी भक्त यहां आता है उसकी हर मनोकामना बाबा भोले पूरी करते हैं। इसीलिए यहां सावन मास तथा शिवरात्रि पर भारी भीड़ पहुंचती है। शहर के लोग बताते हैं कि भगवान शिव की पिंडी स्थापना को कोई लिखित प्रमाण नहीं है लेकिन फिर भी मंदिर के प्रति वर्षों से लोगों के मन मे ंश्रद्धा है। मंदिर के पुजारी दिन-रात भगवान शिव की आराधना करते हैं। हर पहर में महामृत्युंजय जप होता है। मंदिर में प्रात: 6.30 बजे से स्वयंभू शिव एवं पंचायतन की आरती आरम्भ हो जाती है।

इतिहास की नजर से देखें तो बताया जाता है कि यहां एक गुफा सन् 1830 में पता चली थी। इसके बाद यहां भक्तों ने सन् 1901 में इसमें शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दी। वर्ष 1953 में यहां हनुमान प्रतिमा स्थापित की गई। 1960 में मंदिर के को विकसित करने का कार्य किया गया। एक विशाल परिसर है और संस्कृत महाविद्यालय भी है। गुफा मंदिर की ओर से आश्रम, संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय, आयुर्वेदिक औषधालय, वाचनालय, गोशाला और संत सेवा का कार्य वर्षों से किया जा रहा है। इसके साथ ही निराश्रित कन्या विवाह तथा अन्य समासेवी गतिविधियां संचालित होती हैं।

विराजी हैं माता ‘महालक्ष्मी

दूसरी तरफ नए शहर में नेहरु नगर के बांये हिस्से पर भदभदा की तरफ सुरम्य वादियों में बना है। वन प्रबंध संस्थान के सामने करीब 14 हजार वर्गफीट में ‘करुणाधाम आश्रम स्थित है। यहां श्रीयंत्र की आकृति में मंदिर बना है, जहां माता महालक्ष्मी विराजी हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां विराजी माता महालक्ष्मी साक्षात रूप में हैं। यह मंदिर श्रद्धा का प्रमुख केन्द्र तो है ही साथ ही यहां समाज सेवा भी प्रमुख स्थल है। नवरात्र के दौरान यहां देवी का विशेष पूजन होता है। वर्ष 2015 में इस मंदिर का निर्माण हुआ है। यहां 6 फीट ऊंची महालक्ष्मी की प्रतिमा है तथा शिखर 142 फीट लंबा है।

बना समाज सेवा का पर्याय

करुणाधाम आश्रम को समाज सेवा का पर्याय भी कहा जाता है। यहां वृद्धाश्रम संचालित है, जहां सैकड़ो निराश्रित वृद्ध सम्मान पूर्वक अपना जीवन जी रहे हैं। निर्धन वर्ग के लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा यहां मिलती है। गरीबों को प्रतिदिन भोजन परोसा जाता है। आश्रम द्वारा मुक्ति वाहन तथा एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाती है। यहां मधुसूदन के नाम से गौ संरक्षण केंद्र स्थापित है। इसके अलावा कई समाज सेवा के कार्य किए जा रहे हैं। राजधानी से कुछ दूर बुधनी के पास नर्मदा तट पर भी आश्रम स्थापित किया गया है। यहां भी समाज सेवा की गतिविधियां चलाई जाती हैं।

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