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मध्यप्रदेश और सिनेमा: ‘हार्ट ऑफ इंडिया’ से सीधे आपके दिल में..

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भारतीय सिनेमा, विशेषकर हिंदी सिनेमा में देश के लगभग हर हिस्से से, यहां तक कि परदेस से आकर इससे जुड़े कलाकारों, लेखक, निर्देशकों, तकनीशियनों ने अपना-अपना योगदान दिया है। हाँ, अविभाजित पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रान्त की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही, इस सच से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद,बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात का योगदान खास रहा है। लेकिन, चूंकि फिल्मों की भाषा अगर हिंदी हो तो हिंदी बेल्ट यानी उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश से महत्वपूर्ण भागीदारी भी स्वाभाविक तौर पर यहां बननी ही थी। अन्य प्रदेशों की तुलना में मध्यप्रदेश की हिंदी में अपनी कोई विशेष टोन नहीं रही। यहां के कलाकार, लेखक विशुद्ध हिंदी को लेकर ही पले बढ़ेे हैं तो इन दो मामलों में ‘हार्ट ऑफ इंडिया से हिंदी सिनेमा में उल्लेख के लायक बात रही।

  • राजीव सक्सेना , धारावाहिक निर्माता व समीक्षक


सबसे पहले शायरों, गीतकारों को याद करते हैं

पचास के दशक से साठ की ओर जाते हुये जां निसार अख्तर साहब ने फिल्मों में शानदार नगमों से अपनी पहचान बनाई, जो अपने वालिद के साथ, यू पी के खैराबाद से ग्वालियर आकर बस गए थे। बाद में भोपाल को भी उन्होंने अपना मुकाम बनाया। भोपाल से दो और शायर फिल्म जगत में सत्तर के दशक में प्रवेश कर चुके थे- कैफ भोपाली और असद भोपाली। कैफ साहब के अनगिनत गानों में ‘पाकीजा के ‘इन्ही लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा बेहद लोकप्रिय रहा है। असद साहब के बीसियों गीत मशहूर रहे, अंतिम दौर में ‘मैंने प्यार किया के ‘कबूतर जा.. और लगभग सभी गानों ने उन्हें उनके हक का सम्मान दिलाया।

मप्र सरकार में मंत्री रहे दो और गीतकार-कवियों बालकवि बैरागी और विल भाई पटेल ने भी हिंदी फिल्मों में बेहतरीन गाने लिखे। बैरागी साहब ने सुनील दत्त साहब की ‘रेशमा और शेरा के लिए ‘तू चंदा मैं चांदनी लिखा, जिसे लता जी ने अपनी आवाज देकर यादगार बना दिया। विल भाई ने ‘बॉबी फिल्म में ‘झूठ बोले कौआ काटे लिखकर, राजकपूर साहब का सान्निध्य हासिल किया और कई गाने लिखे। बैरागी जी मंदसौर जिले से थे और पटेल साहब सागर निवासी। भोपाल के प्रदीप कौशिक ने ‘सौतन का लोकप्रिय गाना ‘शायद मेरी शादी का खयाल दिल में आया है के अलावा कई गीत लिखे। शायर राहत इंदौरी साहब ने महेश भट्ट साहब के कैंप में कई फिल्मों के मशहूर गाने लिखे। भोपाल को कर्मभूमि बनाने वाले दुष्यंत कुमार कभी फिल्म इंडस्ट्री से सीधे नहीं जुड़े पर उनकी गजलों, गीतों का इस्तेमाल हिंदी फिल्मों मेँ गाहे ब गाहे होता रहा है। जनाब जां निसार अख्तर के बेटे जावेद, भोपाल में अपनी पढ़ाई पूरी करके मुंबई पहुंचे।


उधर, इंदौर से हीरो बनने की गरज से मुंबई पहुंचे सलीम खान। शुरुआती संघर्ष अपने – अपने बलबूते पर कर, जब ये आपस में मिले और जोड़ी बतौर फिल्म पटकथा, संवाद लिखना शुरू किया तो लगातार हिट फिल्में देकर इंडस्ट्री में छा गए।

प्रदेश के फिल्मकार

इंदौर से जयप्रकाश चौकसे ने भी चुनिंदा फिल्मों की पटकथा संवाद के जरिये फिल्म लेखन में जगह कायम की। भोपाल से रूमी जाफरी ने अभिनय से ज्यादा लेखन को तवज्जो दी। गोविंदा और डेविड धवन कैंप की तकरीबन सारी हिट फिल्में रूमी भाई के खाते में हैं..’गॉड तुसी ग्रेट हो , ‘लाइफ पार्टनर और ‘गली गली चोर हैं से रूमी जाफरी निर्देशन मेँ भी कदम बढ़ा चुके हैं। ‘काजल, ‘नीलकमल और ‘चम्बल की कसम जैसी फिल्मों के निर्देशक राम माहेश्वरी ग्वालियर से रहे हैं उनके लेखक मनमोहन कुमार ‘तमन्ना और रामकुमार ‘भ्रमर भी यहीं से हैं..’आ लौट के आ जा मेरे मीत… गाने वाली फिल्म ‘रानी रूपमती इंदौर के रामनारायण मंडलोई ने निर्देशित की थी। पहली मालवी फिल्म ‘भादवा माता और पहली निमाड़ी भाषा की फिल्म ‘संत सिंगाजी भी मंडलोई साहब ने ही बनाई।

राजेश खन्ना अभिनीत ‘दर्द के निर्देशक अम्बरीष संगल जबलपुर निवासी हैं। जबलपुर के विमल कुमार ने ‘आपके दीवाने जैसी कई हिट फिल्में निर्देशित की हैं। जबलपुर से ही राजीव कुमार ने ‘जैसी करनी वैसी भरनी और कई फिल्मों का निर्देशन किया। इंदौर के फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर दर्शन सभरवाल के बेटे सुनील दर्शन ने ‘मेला, ‘जानवर, ‘धड़कन जैसी सफल फिल्मों का निर्माण और निर्देशन दोनों किये तो दूसरे बेटे धर्मेश दर्शन ने ‘राजा हिंदुस्तानी जैसी सुपरहिट फिल्म बनाई। जबलपुर के प्यारेलाल संतोषी जी ने ‘हम एक हैं जैसी कई सफल फिल्में बनाई… उनके बेटे राजकुमार संतोषी के बारे में हर दर्शक बखूबी जानता है, उनके प्रसंशकों भी कमी नहीं। रतलाम के देवेंद्र खंडेलवाल ने अनिता राज और खुद को उनका नायक लेकर ‘मौत की सजा का निर्देशन और निर्माण किया। शहडोल के जोगिंदर सिंह ने ‘रंगा खुश, ‘बिंदिया और बन्दूक फिल्में खुद बनाई और निर्देशित कीं। शिवपुरी के राकेश सरैया ने फिल्म ‘सावधान का निर्देशन किया। नये निर्देशकों मेँ भोपाल से ही फौजिया अर्शी, ‘दिमाग का दही अलंकृता श्रीवास्तव ‘टर्निग थर्टी और विवेक अग्निहोत्री बुद्धा इन ट्रैफिक जाम से सिनेमा संसार मेँ पहचान बना चुके हैं। हिंदी फिल्मों का सबसे बड़ा फायनेंस मध्यप्रदेश से होता आया है।

पुरुषोत्तम अग्रवाल साहब इंदौर के अपने अग्रवाल ग्रुप के जरिये आधी फिल्म इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं। इंदौर के अनिल राठी ने संजय दत्त रवीना टंडन को लेकर ‘विजेता बनाई, उज्जैन के सौभाग्यमल कोठारी ने विनोद मेहरा, शबाना आजमी को लेकर ‘स्वीकार किया मैंने बनाई..सीहोर के आष्टा मेँ पैदा हुये नंदू तोलानी ने गोविंदा को लेकर ‘हीरो नंबर वन और ‘स्वर्ग बनाई…और खुद स्वर्गीय हो गए.. उनकी सन्नी देओल को लेकर फिल्म ‘बजरंग अब तक अधूरी पड़ी हैं..उनके भतीजे राजीव तोलानी ने बॉबी देओल को लेकर ‘चोर मचाये शोर बनाई..इंदौर के ही श्याम जेठवानी ने ‘शायद और ‘कन्हैया, जगदीश थनवार ने ‘मां कसम बदला लूंगा..फिल्मों का निर्माण किया पर ये फिल्में सफल नहीं हुईं. लता मंगेशकर जी सरीखी लीजेंड सिंगर की जन्मस्थली होने का गौरव इंदौर को हासिल हुआ है तो युवा दिलों की धड़कन सलमान खान भी इंदौर में ही पैदा हुये। जॉनी वॉकर साहब, डेजी, हनी ईरानी से लेकर विजयेंद्र घाटगे तक दो दर्जन से अधिक फिल्म कलाकार इंदौर से सम्बन्ध रखते हैं। अभिनेता प्रेमनाथ, कॉमेडियन राजेंद्र नाथ और विलेन रहे नरेंद्रनाथ की जन्म भूमि रीवा है।

ये तीनों राजकपूर साहब के साले भी थे। प्रेमनाथ जी के बेटे प्रेमकिशन, ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए में नायक रहे और आज टीवी शोज के निर्माता हैं। सोहराब मोदी की पसंद एक्टर चंद्रमोहन भोपाल के पास नरसिंहपुर मेँ पैदा हुये तो अभिनेत्री बनमाला ग्वालियर से थीं..किशोर कुमार और अनूप कुमार खंडवा मेँ पैदा हुये, जया भादुड़ी बच्चन जबलपुर में जन्मीं। नये अभिनेताओं मेँ मुकेश तिवारी जी और गोविन्द नामदेव जी सागर से, आशुतोष राणा, नरसिंहपुर के गाडरवारा से हैं। बासु चटर्जी की फिल्म खट्टा मीठा में ‘थोड़ा है थोड़ की जरूरत है गीत गाते, देवेंद्र खंडेलवाल, निर्माता निर्देशक बनने से पहले कई फिल्मों में नायक रहे हैं।


भोपाल से सिनेमा के पर्दे पर पहुंचे ये फनकार
लेखक
जावेद अख्तर
जोड़ीदार इंदौर के सलीम खान
के साथ जंजीर, शोले, डॉन, त्रिशूल जैसी कई हिट फि़ल्में लिखीँ
दिनेश राय
शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा बनाई गई
फिल्म कालका के लेखक
फैज़ सलीम
सैफ कमाल निर्देशित फि़ल्म
सिला के लेखक
रुमी जाफरी
हीरो नंबर वन, कुली नंबर वन, बड़े मियां छोटे मियां जैसी
दजऱ्ेनो हिट फि़ल्में लिखीँ
निर्देशक
रुमी जाफरी
गॉड तुसी ग्रेट हो,गली गली
चोर है और लाइफ पार्टनर
फिल्मों का निर्देशन
विवेक अग्निहोत्री
बुद्धा इन ट्रैफि़क जाम,जूनूनियत, हेट स्टोरी, द ताशकेंट फाइल्स, द कश्मीर फाइल्स,धन दनादन गोल, मोहम्मद एंड उर्वशी, चॉकलेट और जि़द जैसी दजऱ्न भर फिल्मों का निर्देशन
फौजिया अर्शी
दिमाग़ का दही
अलंकृता श्रीवास्तव
टर्निंग थर्टी
गीतकार
कैफ भोपाली
पाक़ीज़ा जैसी कई फिल्मों के
गीतकार
असद भोपाली
पारसमणि से लेकर मैंने प्यार किया.. तक पचास से ज्यादा फिल्मों में गीत लिखे
जावेद अख्तर
सिलसिला से लेकर
1942 ए लव स्टोरी… तक
अनेक फिल्मों के गीत लिखे
प्रदीप कौशिक
सौतन फि़ल्म का हिट गीत
शायद मेरी शादी का खयाल…
लिखा
गायिका
शकीला बानो भोपाली, कव्वाल
सुधा मल्होत्रा, गज़़ल गायिका

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