Home स्थापना दिवस रोजगारोन्मुखी शिक्षण देने वाले बड़े संस्थान और लाने की जरूरी

रोजगारोन्मुखी शिक्षण देने वाले बड़े संस्थान और लाने की जरूरी

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  • अनिल सिंह

भोपाल पिछले कुछ सालों में किस तरह बदला है, इसे देखना शुरू करें तो कई सारी बातें दिखती हैं। महानगरों की तर्ज पर रहाइशी इमारतों, रेस्टोरेन्ट, जिम और शॉपिंग मॉल की एक लंबी फेहरिस्त बताई जा सकती है। और अब तो कहने के लिए मेट्रो भी है। लेकिन क्या एक शहर की बस इतनी ही जरूरत होती है ? स्कूली पढ़ाई करके निकले उसके हजारों- हजार किशोरों का क्या जो युवावस्था की दहलीज पर हैं, और भविष्य के लिए बेहतर विकल्प की तलाश कर रहे हैं। एक शहर, इंजीनियरिंग और मेडिकल से ज्यादा उन्हें कुछ देने की स्थिति में नहीं।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति साफ तौर पर इस बात की तरफ इशारा करती है कि स्कूल के दौरान ही बच्चों के पास उनकी रुझान के तमाम विषय और हुनर सीखने के अवसर होने चाहिए। जो न सिर्फ आजीविका की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि एक व्यक्ति के रूप में संतोषजनक और आत्मविश्वासी ढंग से आगे बढऩे के लिए बेहद जरूरी है। संगीत, नाट्य, चित्रकला, रचनात्मक लेखन, फिल्म प्रोडक्शन, विज्ञापन निर्माण, रसोई कला, वस्त्र- विन्यास, सब्जी-फल उत्पादन, पब्लिकेशन, समाज कार्य जैसे अनगिनत ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर स्कूल शिक्षा के दौरान ही विकल्प और सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत है।

साथ ही इन विषयों में उच्च अध्ययन के संस्थान भी शहर में होने चाहिए ताकि सभी इनमें एक बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण हासिल कर सकें। अभी भोपाल को इस दिशा में आगे आने की जरूरत है। स्कूलों की तादाद बढऩा एक बात है लेकिन एक ही तरह के स्कूलों का खुलते जाना कोई अच्छी बात नहीं। वे सब एक ही तरह का स्कूली ढांचा उपलब्ध कराते हैं जो कि नागरिक शिक्षण की राह में एक रुकावट है। लोकतान्त्रिक और वैकल्पिक स्कूली शिक्षा की बहुत जरूरत है ताकि बच्चों में प्रजातांत्रिक व्यवहार, समानता, वैज्ञानिक सोच, संवेदनशीलता और सहिष्णुता जैसे मूल्य विकसित होने के भरपूर अवसर बनें। वरना फैक्ट्री मोड में तो स्कूल अपना काम कर ही रहे हैं।

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