Home स्थापना दिवस आज भी नहीं बदला भोपाल का ‘रंगजगत’

आज भी नहीं बदला भोपाल का ‘रंगजगत’

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नजीर कुरैशी, (वरिष्ठ रंगनिदेशक और फिल्म लेखक)

भारतीय रंग जगत में विशेष रंगमंच के क्षेत्र में भोपाल का खास स्थान है। सबसे ज्यादा गतिविधियों और सक्रियता के कारण जितने रंग समूह भोपाल में हैं,शायद ही कहीं हों। हालांकि एक कटु सत्य है कि अन्य स्थानों की तरह भोपाल का हिंदी रंगमंच अभी ‘व्यावसायिक’ नहीं हो पाया है।
जबकि पिछले डेढ़ साल से भी अधिक समय से रंगकर्मियों पर भी महामारी की मार पड़ी है। लंबे अरसे से नाटकों का मंचन बंद है। फिर भी कलाकार नाटकों को तेयार करने में लगे हैं। अपने-अपने स्तर पर नवाचार कर रहे हैं। जैसे ही गतिविधियां शुरु होंगी शहरवासियों को अच्छे नाटक देखने को मिलेंगे। यह सब भोपाल के रंगजगत की जीवटता का प्रमाण ही कहा जायेगा।

तेजी से बदलते शहर में भले ही बहुत कुछ बदलाव हुए हैं। तकनीकी दौर में नाटकों के मंचन में भी कई तरह के बदलाव आये लेकिन रंगजगत की प्रकृति नहीं बदलेगी। यदि हम बात करें तो टॉकीज खुल गए किंतु रंगशालाओं के व्यावसायिक नहीं होने के कारण सरकार की नजर इन पर नहीं है।
पिछले वषों में भोपाल फिल्मी दुनिया का पसंदीदा स्थल बना है।

यहां कई फिल्मों की शूटिंग हुई हैं। आने वाले समय में और भी प्रस्तावित है। इससे भोपाल की प्रतिभाओं में उम्मीद जागी है। लेकिन कोरोना ने यहां भी पहिया जाम कर रखा है। खुद मेरी लिखी फिल्म ‘राग’ 26 मार्च को रिलीज हो चुकी है। और उसके बाद से भोपाल सहित प्रदेश में कई स्थानों पर सिनेमाघर बंद हो गए। लेकिन इस शहर के कला-जगत ने अपना हौसला नहीं खोया है और न ही खोयेगा।

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