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कोरोना से पिता की मौत भी न डिगा सकी फर्ज से, डॉक्टर बेटे ने अगले दिन ही ज्वाइन की ड्यूटी

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डॉक्टर को धरती का भगवान ऐसे ही नहीं कहा जाता है. अपने फर्ज के लिए ये अपना हर दुख भुला देते हैं. ऐसा ही मामला प्रकाश में आया महाराष्ट्र के पुणे में, जहां पिता की कोरोना से मौत होने के बाद चिकित्सक ने उनका अंतिम संस्कार किया. इसके बाद उसने वक्त गवाए बिना ही अगले दिन ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली. 

 महाराष्ट्र के पुणे में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने कोरोना से पिता की मौत के एक दिन बाद ही कोविड-19 मरीजों का इलाज शुरू कर दिया.  45 साल के डॉक्टर मुकुंद पेनुरकर की मां और भाई भी कोविड-19 पॉजिटिव हैं और उनका इलाज भी चल रहा है.   एक हजार से ज्यादा का कर चुके हैं उपचार  

पुणे के कर्वे रोड इलाके में स्थित संजीवन अस्पताल में कोविड वार्ड के डायरेक्टर डॉ. मुकुंद पेनुरकर फिजिशियन हैं. ये कोरोना महामारी की दस्तक के बाद से ही मरीजों के इलाज में जुटे हैं, पिछले 13 महीने में डॉ. पेनुरकर करीब एक हजार कोविड-19 मरीजों का इलाज कर चुके हैं. डॉ. पेनुरकर की पत्नी डॉ. अदिति पेनुरकर एनस्थिसियोलॉजिस्ट के तौर पर संजीवन ग्रुप के सांसवड स्थित अस्पताल में कार्यरत हैं.  45 साल के डॉ. पेनुरकर के मुताबिक मरीजों की सेवा ही उनके 85 साल के पिता को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि है.   

नागपुर से बुलाए थे माता-पिता 

डॉ. पेनुरकर बताते हैं कि पिछले साल पुणे में जब कोरोना केसों ने तेजी से बढ़ना शुरू किया, तो उन्होंने अपने वृद्ध माता-पिता पास नागपुर भेज दिया, क्योंकि वे दोनों पति-पत्नी कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे थे, नागपुर से बुलाए थे माता-पिता को कोई जोखिम न हो, लेकिन कोरोना की इस दूसरी लहर में पिछले महीने भाई भी कोरोना से संक्रमित हो गया. बाद में माता-पिता का कोविड-19 टेस्ट भी पॉजिटिव आया. भाई और माता-पिता दोनों को ऑक्सीजन बेड्स की आवश्यकता थी, लेकिन नागपुर में इनका मिलना मुश्किल था. ऐसे में तीनों को पुणे से नागपुर एंबुलेंस भेजकर संजीवन अस्पताल में ले आया गया. 

आंखों के सामने गई पिता की जान  

डॉ. पेनुरकर के लिए अपने माता-पिता और भाई के साथ-साथ 75 और कोविड-19 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी भी थी. जब डॉ. पेनुरकर राउंड पर थे और सभी मरीजों का हाल जान रहे थे, उसी वक्त उनके पिता की तबीयत बहुत खराब हो गई. डॉ. पेनुरकर जब तक पिता के बेड के पास पहुंचते तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉ. पेनुरकर और ना हीं उनके साथी डॉक्टर कुछ कर सके. पिता तो पिता ही होता हैं. पिता के दम तोड़ने के बाद डॉ. पेनुरकर रो पड़े. 

मां और भाई हुए रिकवर 

अस्पताल में आने के बाद भी डॉ. पेनुरकर के माता-पिता उनसे यही कहते रहे कि वो बाकी कोविड मरीजों के इलाज पर ध्यान रखें, क्योंकि उन्हें एमडी फिजिशियन की बहुत जरूरत है. डॉ. पेनुरकर ने अपने पिता का अंतिम संस्कार अकेले किया और अगले दिन ही ड्यूटी पर लौटकर मरीजों का इलाज शुरू कर दिया. डॉ. पेनुरकर के लिए ये राहत की बात है कि उनकी मां और भाई कोविड-19 से रिकवर हो गए हैं. 

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