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20 वर्षों तक अपने पैर पर चलने के लिए करते रहे संघर्ष, और जिंदगी जीने के जुनून ने डाल दी पैरों में जान

  • विकलांगता को नहीं बनने दिया सफलता का रोड़ा, लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी विपिन जैन की कहानी
    नई दिल्ली ।
    विपिन जैन को दो पैरों से चलने के लिए भले ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हो लेकिन ये उनका जज़्बा और हौसला ही था, जिसने उन्हें मुंबई, वडोदरा, अहमदाबाद, लिमडी (गुजरात), इंदौर और यूएसए में मौजूद 40 से अधिक लोगों की टीम वाली एक मल्टीलोकेशनल सीए फर्म का फाउंडर पार्टनर बना दिया है. उन्होंने मेसर्स मनोज विपिन एंड कंपनी की स्थापना अपने बड़े भाई मनोज जैन के नेतृत्व में साल 2003 में की थी। विपिन का जन्म गुजरात के एक छोटे से गाँव, लिमडी में 18 दिसंबर,1975 को बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था। जन्म के 8वें महीने में यह जानकर कि कमर से नीचे के हिस्से में पोलियोमाइलाइटिस बीमारी की वजह से वह चल नहीं सकते, उनके परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा। कई वर्षों के संघर्ष के बाद 12 वर्ष की उम्र में लायंस क्लब द्वारा मिली ट्राइसाइकिल से उन्हें चलने का नया हौसला मिला। लेकिन फिर भी अपने पैरों पर चलने के लिए लगभग 20 वर्षों तक विपिन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1994 में, इंदौर के जाने-माने आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रकाश बंगानी के माध्यम से उनके घुटनों की पहली सुधारात्मक सर्जरी हो सकी। जिसके बाद विपिन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन ये बस शुरुआत थी, और आगे की राह भी इतनी आसान नहीं होने वाली थी। अपने आगे के सफर के बारे में विपिन बताते हैं कि, “जीवन जीने का जुनून मुझ में इस कदर था कि मेरी जीने की चाह ने मुझे कभी पीछे मुड़कर देखने ही नहीं दिया।” विपिन ने स्नातक के बाद सीए की पढ़ाई की और अब वह एक सफल सीए हैं। वहीं 8 सफल सर्जरीज़ के बाद, अब वह अपने सभी कार्यों को स्वयं करने में सक्षम हो गए हैं। विपिन अब कैलिपर्स और कैनेडियन क्रच (बैसाखी) की मदद से अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, जिसका श्रेय वे अपने धैर्य, परिवार, शुभचिंतकों का आशीर्वाद और डॉ. बंगानी के प्रयासों को देते हैं। विपिन ने 80% विकलांगता की कठिनाइयों का सामना करते हुए एक मक़ाम हासिल किया, जो विकलांगों के साथ सक्षम लोगों के लिए भी एक उपयुक्त उदाहरण है। विपिन जैन जयपुर स्थित एक एनजीओ, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के इंदौर केंद्र का अभिन्न अंग है, जहाँ वे मानद ऑडिटर और एडवाइजर की भूमिका निभा रहे हैं। यह एनजीओ गरीबी और विकलांगों को फ्री कैलिपर्स और जयपुर फुट उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही वे अरिहंत चैरिटेबल ट्रस्ट, इंदौर के ट्रस्टी, और अरिहंत चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित अरिहंत हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर के 100 बेड वाले अत्याधुनिक अस्पताल के मुख्य प्रबंधन का भी हिस्सा हैं। विकलांगता विपिन के साहस की प्रवृत्ति और जीवन जीने के जुनून को किसी भी मायने में हिला नहीं सकी है। उन्होंने हमेशा अपनी सीमाओं से परे जाकर काम किया है। विपिन 15 से अधिक वर्षों से एक मॉडिफाइड कार चला रहे हैं और दुनियाभर के विभिन्न देशों का दौरा भी कर चुके हैं। शरीर की कमियों को मन पर हावी न होने देने वाले विपिन आज एक सफल सीए हैं, जो पिछले 20 सालों से अपनी मल्टीलोकेशनल फर्म में 40 से अधिक सदस्यों की टीम का सफलतम नेतृत्व कर रहे हैं। ऑडी कार ड्राइव करने वाले विपिन, एडवेंचर प्रेमी और स्काई डाइवर भी हैं, जिन्होंने 24 जून, 2018 को अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आकाश में से 14000 फीट की ऊँचाई से गोता लगाकर स्काई डाइविंग का प्रदर्शन किया था। इन्हें मिलने वाले सम्मानों में लायंस क्लब लिमडी द्वारा विशेष व्यक्तित्व पुरस्कार, दिव्यांग रत्न, उम्मीद रत्न और दिव्यांग उद्यमी पुरस्कार शामिल हैं। उम्मीदों से परे उपलब्धियाँ हासिल कर के विपिन जैन ने एक अद्भुत मिसाल कायम की है। जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है।

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