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हाई कोर्ट की दो टूक- दिल्ली के अस्पतालों को ऑक्सीजन के साथ सुरक्षा भी दी जाए, पढ़ें सुनवाई के अपडेट

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हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि अगर अस्पताल में हिंसा भड़क गई तो क्या होगा? इस पर केंद्र ने कहा कि मामला पुलिस विभाग संज्ञान में है. यदि निश्चित रूप से आवश्यकता होगी तो हम सुरक्षा प्रदान करेंगे. 

ऑक्सीजन की कमी को लेकर आज शनिवार को एक के बाद एक करके 4 अस्पताल दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गए और उन्होंने मरीजों की जान बचाने के लिए तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराने की मांग की. कोर्ट सुनवाई के दौरान बेहद सख्त नजर आया और उसने सरकार से पूछा कि दूसरी लहर नहीं बल्कि यह एक सुनामी है. मई के मध्य में यह पीक पर होगा, ऐसे में तैयारी कैसी है? 

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली के वकीलों के बीच बहस भी हो गई. कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई. हाई कोर्ट में महाराजा अग्रसेन अस्पताल के अलावा जयपुर गोल्डन अस्पताल, सरोज अस्पताल और बत्रा अस्पताल ने भी याचिका लगाई थी. आइए, जानते हैं कि कोर्ट में आज क्या कुछ हुआ. 

हाई कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन टैंकरों की खरीद के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे. हम दोनों सरकारों के अधिकारियों से बातचीत और समन्वय की उम्मीद करते हैं. कोर्ट ने कहा कि हम सभी ऑक्सीजन सप्लायर्स को निर्देशित करते हैं कि वे दिल्ली के अस्पतालों में दिए जाने वाले ऑक्सीजन का पूरा विवरण उपलब्ध करवाएं.  

साथ ही कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों को उनकी मांग के मुताबिक पुलिस सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए. जरूरत के हिसाब से सुरक्षा सुनिश्चित हो. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आप नहीं जानते हैं कि जब उनके करीबी और प्रिय लोग परेशान होंगे तो लोग कैसी प्रतिक्रिया देंगे. हालांकि केंद्र ने पुलिस सुरक्षा दिए जाने का विरोध किया. 

कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि अगर अस्पताल में हिंसा भड़क गई तो क्या होगा? इस पर केंद्र ने कहा कि मामला पुलिस विभाग संज्ञान में है. यदि निश्चित रूप से आवश्यकता होगी तो हम सुरक्षा प्रदान करेंगे. लेकिन यदि कोर्ट ऐसा आदेश जारी करता है तो हम पर अनुरोधों की बाढ़ आ जाएगी. 

हम निश्चित तारीख चाहते हैंः HC

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यह दूसरी लहर नहीं है बल्कि एक सुनामी है और अभी भी नए मामलों में तेजी आ रही हैं. हम उम्मीद कर रहे हैं कि मई के मध्य में यह पीक पर पहुंच जाएगा. हम इसकी तैयारी कैसे कर रहे हैं? जयपुर गोल्डन अस्पताल में रिश्तेदार की मौत पर विलाप करता शख्स (पीटीआई)

480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति पर हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि हम दिल्ली को 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की उम्मीद कब तक करें. जो गलत है वो गलत है. कुल मिलाकर इसे आम जनता को ही वहन करना पड़ेगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपको मिलकर काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऑक्सीजन उपलब्ध है  लेकिन टैंकर एक मुद्दा है.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संबंध में विस्तृत ब्योरा मांगा. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार को खुद का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की जरूरत है. 

कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर कोई ऑक्सीजन की सप्लाई में रुकावट पैदा करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर कोई अधिकारी ऑक्सीजन की सप्लाई को रोकता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. 

क्या रहा केंद्र का पक्ष

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश ASG के माध्यम से बताया कि हमारे अधिकारी लगातार दिन-रात काम कर रहे हैं कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके. केंद्र के अधिकारी पीयूष गोयल ने कहा कि कल हरियाणा और यूपी में कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ा था. केंद्र ने यह भी कहा कि भारतीय वायु सेना दुर्गापुर से ऑक्सीजन को एयरलिफ्ट करने की योजना पर कर रही है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील और सॉलिसिटर जनरल (SG) के बीच नोक-झोंक हो गई और एक-दूसरे पर निशाना भी साधा. सॉलिसिटर जनरल ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा कि मैं अब आपको चेतावनी दे रहा हूं, आप मेरे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं. आप जो कर रहे हैं वो बर्दाश्त करने लायक नहीं है. हम यहां चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. 

केंद्र ने हाई कोर्ट से कहा कि आने वाले हफ्तों में नए मामलों में तेजी से वृद्धि हो सकती है. यह पैनिक होने की जरुरत नहीं है, लेकिन हमें सबसे बुरे के लिए तैयार रहना होगा.

दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा कि केंद्र ने हमें आश्वासन दिया है कि 480 मीट्रिक टन आपूर्ति की जाएगी लेकिन ऐसा नहीं किया गया. 

दिल्ली सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि सरकार की ओर से दो प्रतिष्ठित उद्योगपतियों से संपर्क किया गया है. अधिकांश राज्य सरकारें पहले से ही टैंकरों का उपयोग कर रही हैं. ट्रांसपोर्टेशन महत्वपूर्ण है लेकिन ट्रांसपोर्टेशन नहीं हो रहा है. 

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