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वर्धा की तरह छत्‍तीसगढ़ के नवा रायपुर में बनेगा 21वीं सदी का गांधी जी का ‘सेवा ग्राम’

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रायपुर। आजादी के 75वें वर्ष में आजादी की लड़ाई के मूल्यों, सिद्धांतों, आदर्शों और महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की संकल्पना को अक्षुण्ण रखने के लिए नवा रायपुर में भी वर्धा की तर्ज पर सेवा ग्राम की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए नवा रायपुर 75 से 100 एकड़ की जमीन चिन्हांकित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा है कि संस्थान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने व आत्मनिर्भर ग्राम की कल्पना को साकार करने के लिए सभी प्रकार के कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था का प्रविधान भी किया जाए। मुख्यमंत्री ने दो अक्टूबर 2021 से पहले इस संबंध में कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

नवा रायपुर में प्रस्तावित इस सेवा ग्राम का निर्माण मिट्टी, चूना, पत्थर जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हुए किया जाएगा। यह परियोजना गांधी दर्शन को याद रखने और सीखने की प्रेरणा देगी। साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन की यादों और राष्ट्रीय इतिहास को भी इसके माध्यम से जीवंत रखा जा सकेगा। सेवाग्राम में गांधीवादी सिद्धांतों, ग्रामीण कला और शिल्प के केंद्र विकसित किए जाएंगे। जहां अतिथि विषय विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही वहां वृद्धाश्रम व वंचितों के लिए स्कूल भी स्थापित किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देकर, राज्य की लोक कलाओं को प्रोत्साहन देकर, बुजुर्गों को दूसरा-घर देकर और वैचारिक आदान-प्रादन के लिए छत्तीसगढ़ में एक विश्वस्तरीय व्यवस्था का निर्माण करके स्थानीय लोगों का सशक्तिकरण करना है। सेवा ग्राम में प्रस्तावित ‘विजिटर्स सेंटर” सीखने, निर्वाह करने और गांधी के सिद्धांतों का स्मरण करने का केंद्र जगह होगा।

यह सेवाग्राम एक ऐसा स्थान होगा जहां आगंतुक स्थानीय कला और शिल्प, स्थानीय व्यंजनों को बारे में जान सकेंगे। अपनी जानकारियों और अनुभवों को साझा कर सकेंगे। सेवा ग्राम में एक ओपन थियेटर भी होगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

वर्धा में 1936 में बना था सेवाग्राम

महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम की स्थापना वर्ष 1936 में महात्मा गांधी और उनकी सहधर्मिणी कस्तूरबा के निवास के रूप की गई थी, ताकि वहां से वे मध्य भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व कर सकें। वर्धा का यह संस्थान महात्मा गांधी के सपनों के अनुरूप ग्रामीण भारत के पुननिर्माण का केंद्र भी था।

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