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पिता का साया उठा तो दो बच्चों समेत पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाने एक साथ आ गया गांव

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दौर ऐसा है कि कई लोगों का परिवार टूट गया, लेकिन यही दौर है जब मदद करने वाले हाथ रुक नहीं रहे हैं। कुनकुरी के ठेठेटांगर गांव कोरोना ने भुइयार परिवार की खुशियां छीन लीं। दो मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। पत्नी विधवा हो गई और मां का सहारा भी अब नहीं रहा।

गरीब परिवार के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि दो बच्चे, पत्नी और मां का खर्च उठाने की जिम्मेदारी 30 वर्षीय सुरेश राम के कंधों पर थी। ऐसे समय में गांव वाले साथ खड़े हो गए हैं। रोज परिवार के पास कोई न कोई आता है, उनकी जरूरतें पूछता है और उसे पूरा करने की कोशिश करता है। गांव के सरपंच ने भी जरूरी सामान दिए हैं और आश्वासन भी कि जल्द परिवार के लिए कुछ न कुछ होगा।शेष|

सुरेश की तबीयत कई दिनों से खराब थी। गुरुवार को सांस लेने में तकलीफ ज्यादा हुई तो ग्रामीणों ने युवक को कुनकुरी के हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इलाज के दौरान शुक्रवार को युवक ने दम तोड़ा दिया। कोरोना से पहली मौत के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। दैनिक भास्कर की टीम जब गांव पहुंची तो चारों तरफ सुरेश की मृत्यु की चर्चा हो रही थी। सरपंच राजेश से हमारी बात हुई तो उन्होंने बताया कि कोरोना से गांव में पहली मौत हुई है। भुइयार परिवार इस दुख को नहीं सह पा रहा है।

हमने सरपंच को साथ लिया। पीपीई किट पहनकर मृतक के घर पहुंचे। वहां देखा, 28 वर्षीय पत्नी माधुरी बाई, 4 साल का मासूम आर्यन राम, डेढ़ साल की आकृति और 50 साल की मां रुचि बाई की आंखों से सुरेश के जाने का दर्द टपक रहा था। पत्नी माधुरी बोली कि बच्चे अनाथ न हो इसलिए जीना पड़ेगा। वहीं बच्चों के मुंह से आवाज आई कि अब पापा नहीं आएंगे। मां बोलीं, मेरा तो सहारा टूट गया। परिवार कैसे चलेगा। कहा कि गांव वाले आते हैं, मिलते हैं, जरूरतें पूछते हैं और मदद भी करते हैं। लेकिन कब तक मदद चलती रहेगी। इस पर सरपंच ने कहा कि चिंता मत करो, जल्द ही कुछ न कुछ होगा परिवार के लिए। सब ठीक हो जाएगा।

खजरीढाप में वैक्सीन का विरोध

पत्थलगांव के गांव खजरीढाप में वैक्सीन का विरोध हो रहा है। किसी अफवाह के चलते जिन्हें पहला डोज लग गया है, वे अब दूसरा डोज लगवाने भी नहीं जा रहे। गांव की आबादी लगभग 1 हजार है। बता दें कि गांवों में टेस्टिंग कम है। ऐसे में लोगों को पता नहीं रहता कि वे पॉजिटिव हैं या निगेटिव। केंद्र के कर्मियों के मुताबिक इस स्थिति में टीका लगवाने से तबीयत खराब होने का अंदेशा रहता है। ऐसे में हो सकता है कि एक दो केस बिगड़ गए हों और लोग डर रहे हों।

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