Home छत्तीसगढ़ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में आज से 7 दिन का कोरोना कफ्र्यू

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में आज से 7 दिन का कोरोना कफ्र्यू

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  • 24 घंटे में 107 लोगों की मौत हुई

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में 107 लोगों की मौत हुई है। हफ्तेभर से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही थी, लेकिन एक साथ 100 से ज्यादा मौतें नहीं हुई थीं। हर रोज औसतन 95 कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। सिर्फ 7 दिनों में 668 लोगों की जान गई है।हालात बिगडऩे की वजह से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में लॉकडाउन लगाने का फैसला किया गया है। 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे से 21 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक जिले में सब कुछ बंद रहेगा। 28 जिले वाले छत्तीसगढ़ में अब तक 17 जिलों में लॉकडाउन का ऐलान किया जा चुका है। इनमें शामिल दुर्ग जिले में लॉकडाउन को 19 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। पहले यहां 6 से 14 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। कोरोना के बीच प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में मंगलवार सुबह से जूनियर डॉक्टर्स ने हड़ताल कर दी है। जूनियर डॉक्टर्स सिर्फ कोविड वार्ड में सेवाएं दे रहे हैं। अपनी मांगों को पूरा करने के लिए इन्होंने 18 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है। इनका कहना है कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो सभी इमरजेंसी सर्विस और कोविड वार्ड की ड्यूटी करना भी बंद कर देंगे।

इन वजहों से लोगों की हो रहीं मौतें

12 अप्रैल की रात को सरकार की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि मरने वालों में ज्यादातर सांस में तकलीफ के लक्षण से परेशान थे। 57 लोगों की जान कोविड के गंभीर संक्रमण के चलते गई। 50 ऐसे लोगों की भी मौत हुई जिन्हें दूसरी बीमारी थी। इन लोगों में दो बीमारी कॉमन नजर आई वो थीं वो हैं हाइपरटेंशन और डायबिटीज। अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर्स ने बताया कि इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मौत ज्यादा हो रही है, इनकी स्थिति बिगड़ रही है। पिछले सप्ताह हुई 25 मौतों की जानकारी सोमवार को सरकार के पास आई थी, इनमें 11 कोविड और 14 कोरोना के साथ दूसरी बीमारियों से भी पीड़ित थे।

दुर्ग के रेलवे स्टेशन पर निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी

रेलवे सुरक्षाबलों की ओर से सोमवार को ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों में रोको-टोको अभियान चलाया गया। इसके तहत दुर्ग, पावर हाउस, भिलाई-3 जैसे स्टेशनों पर यात्रियों को सही तरीके से मास्क पहनने के तरीके बताए गए। इसके अलावा कोरोना की जांच जरूरी किए जाने की जानकारी दी गई। यात्रियों को बताया गया कि बिना जांच ट्रेन में एंट्री नहीं मिलेगी। स्टेशन से बाहर निकलते समय हर यात्री को निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर कोविड टेस्ट का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। दुर्ग में पिछले 24 घंटे में 1,591 नए मरीज मिले हैं और 11 लोगों की जान गई है। यहां अब 17,878 एक्टिव मरीज हैं।

खराब गुणवत्ता की पीपीई किट और मास्क पर भड़के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए

रायपुर। कोरोना संक्रमण की भयावह होती स्थिति के बीच जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी है। जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें खराब गुणवत्ता के पीपीई किट, मास्क और सर्जिकल ग्लव्स पहनकर कोरोना ड्यूटी के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसकी वजह से उनमें आधे से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। संक्रमित रेजिडेंट डॉक्टरों को अवैतनिक अवकाश के लिये मजबूर किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षा संचालक को ज्ञापन सौंप कर बताया है कि वे लोग आज से कोरोना और आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर शेष कार्यों को तत्काल प्रभाव से बंद कर रहे हैं। उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो 15 अप्रैल से वे आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर देंगे। फिर भी बात नही मानी गई तो 18 अप्रैल सुबह 8 बजे से कोविड ड्यूटी भी छोड़ देंगे। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉक्टर आरके सिंह से इस संबंध में बातचीत जारी है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना ड्यूटी के गुणवत्ता वाले पीपीई किट, एन-95 मास्क और ग्लब्स की मांग लंबे समय से की जा रही है। अभी तक प्रशासन ने इसका संज्ञान तक नहीं लिया है। पीपीई किट के नीचे पहनने के लिए स्क्रब तक उपलब्ध नहीं हैं।

एक साल बाद भी व्यवस्था नहीं हुई :


जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर इंद्रेश की ओर से कहा गया कि पिछले एक वर्ष से सभी रेजिडेंट डॉक्टर कोरोना के इलाज में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रशासन के पास पर्याप्त समय होने के बावजूद इस महामारी से लडऩे के पर्याप्त इंतजाम नहीं किये गये। इसका हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। हममें से बहुत से डॉक्टर खुद संक्रमित हो चुके हैं। जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि उन्हें इस छोटे और तंग कमरे में पीपीई किट पहनकर तैयार होना प?ता है। इसकी वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

जूनियर डॉक्टरों ने यह मांगे रखीं

  • दूरस्थ स्थलों पर तैनात सभी डॉक्टरों को कोरोना ड्यूटी में शामिल किया जाए।
  • अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्निशियन, वार्ड ब्वॉय, स्ट्रेचर ब्वॉय और सफाई कर्मियों की संख्या ब?ाई जाए।
  • अस्पतालों में सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए।
  • उचित संख्या में डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाकर अलग से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाए।
  • भीषण गर्मी में भी खुले बरामदे में एक पंखे के सहारे ड्यूटी करने की मजबूरी से भी डॉक्टरों में नाराजगी है।
  • भीषण गर्मी में भी खुले बरामदे में एक पंखे के सहारे ड्यूटी करने की मजबूरी से भी डॉक्टरों में नाराजगी है।
  • अपनी सुविधाएं बढ़ाने की भी मांग रखी
  • जूनियर डॉक्टरों ने ग्रामीण क्षेत्र में सेवा का अनुबंध दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने की मांग की है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में सेवा के लिए प्रदेश भर में एक समान 95 हजार रुपए का स्टाइपेंड प्रदान किया जाए।
  • छात्रवृत्ति बढ़ाकर इंटर्न डॉक्टर को 20 हजार, पीजी डॉक्टर प्रथम वर्ष को 80 हजार और पीजी डॉक्टर द्वितीय और तृतीय वर्ष को 85 हजार रुपए दिये जाएं।
  • कोरोना ड्यूटी वालों को प्रोत्साहन राशि दी जाए। रेजिडेंट डॉक्टर को 10 हजार, पैरामेडिकल स्टाफ को 500 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 200 रुपए।

राज्यपाल से मिला केंद्र सरकार का प्रतिनिधि मण्डल

राज्यपाल अनुसुईया उइके से मंगलवार को राजभवन में भारत सरकार के प्रतिनिधि मण्डल ने मुलाकात की और प्रदेश में कोरोना संक्रमण से निर्मित परिस्थितियों से संबंधित जानकारी प्रदान की। प्रतिनिधिमण्डल में भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं नोडल अधिकारी श्री जिगमेट टकपा एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय संचालक डॉ. के. एम. कांबले शामिल थे। राज्यपाल ने कहा कि इस समय आपदा का समय है। हम सबको समन्वय बनाकर कार्य करना है और एकजुट होकर इस समस्या पर जल्द से जल्द मुक्ति पाना है। छत्तीसगढ़ को इस संकट से निपटने के लिए जो भी आवश्यकताएं हैं, आप केन्द्र सरकार को सुझाव दीजिए और यह प्रयास करें कि प्रदेश को केन्द्र सरकार से जल्द से जल्द मदद मिले, जिससे छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिले एवं यहां की जनता को राहत मिले। साथ ही यह प्रयास करें कि केन्द्र सरकार से इस बीमारी से ग्रसित गरीबों के इलाज के लिए आवश्यक मदद मिले। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव अमृत कुमार खलखो उपस्थित थे।

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