Home छत्तीसगढ़ कोरोना संकट में बीच का रास्ता निकालना था, लेकिन ऐसा मूल्यांकन चुनौतियां...

कोरोना संकट में बीच का रास्ता निकालना था, लेकिन ऐसा मूल्यांकन चुनौतियां बढ़ाएगा, प्रथम श्रेणी वालों को हर बार साबित करना होगा

12
0

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने आज 10वीं परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि बिना लिखित परीक्षा के ही परिणाम जारी हुआ। ऐसा कोरोना संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए किया गया। लेकिन शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसा मूल्यांकन नई चुनौतियां लेकर आया है।

शिक्षाविद डॉ. जवाहर शुरिशेट्‌टी ने बताया, इस तरह के मूल्यांकन के अपने फायदे भी हैं और नुकसान भी। फायदा तो यह है कि औपचारिक परीक्षा के दौरान कोई विद्यार्थी बीमार हो गया तो उसका एक साल बर्बाद चला जाता। इसकी भरपाई नहीं थी। कोरोना संकट के समय इसकी आशंका अधिक थी। इसलिए इंटरनल असेसमेंट का तरीका आजमाया गया। लेकिन सच तो यही है कि इस तरह विद्यार्थी की प्रतिभा का सही आकलन नहीं हाेता। बहुत से औसत विद्यार्थियों को भी इस आधार पर प्रतिभावान विद्यार्थी से अधिक अंक मिल सकते हैं कि किन्हीं वजहों से शिक्षक उसे पसंद करता है। अगर स्कूलों पर ही मूल्यांकन को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर स्कूल परिणाम सुधारने के लिए अधिक से अधिक अंक देंगे। यह इस बार दिख भी रहा है। 97% परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में पास हुए हैं।

छत्तीसगढ़ RTI फोरम के प्रदेश संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय कहते हैं कि कोरोना संकट में परीक्षा को ताे टाला जाना चाहिए था, लेकिन मूल्यांकन के विकल्पों पर सभी स्टेक होल्डर से चर्चा जरूर होनी चाहिए थी। पूरे वर्ष वैसे ही पढ़ाई नहीं हुई। अब जो परिणाम आए हैं, उनमें विद्यार्थी कितना सीख पाया है, उसका मूल्यांकन तो शामिल ही नहीं है। आशंका है कि भविष्य में इस वर्ष पास हुए लोगों की मेरिट पर लोग संदेह करें। ऐसा नहीं भी हुआ तो विद्यार्थी को अगली कक्षाओं में बार-बार अपनी मेरिट को सही साबित करने की चुनौती बनी रहेगी।

ऐसी भी चुनौतियां आ सकती हैं

डॉ. शुरिशेट्‌टी ने बताया, अमूमन होता यह है 11वीं कक्षा में जब विषय चुनने की बारी आती है तो कम नंबर वाले को फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ-बायोलॉजी जैसे विषय नहीं दिए जाते। अभी एक कक्षा के अधिकतर विद्यार्थियों को एक जैसे नंबर मिले हैं। ऐसे में मूल्यांकन मुश्किल है कि किसे कौन सा विषय दिया जाए ताकि उनका बेहतर विकास हो।

CBSE ने मूल्यांकन का अलग तरीका बनाया है

शिक्षाविदों ने बताया, इसी तरह की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (CBSE) ने मूल्यांकन का अलग तरीका बनाया है। इसके मुताबिक किसी स्कूल का परिणाम पिछले वर्ष हुई परीक्षा के औसत परिणाम से अधिक नहीं हो सकता है। इससे नंबरों के एकदम से अधिक कर देने की प्रवृत्ति पर कुछ हद तक अंकुश लगा है।

ऐसा रहा है 10वीं का परीक्षा परिणाम

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने आज 10वीं परीक्षा के परिणाम जारी किए। परीक्षा में कुल 4 लाख 61 हजार 93 बच्चों का आंतरिक मूल्यांकन किया गया था। इसमें सभी पास हो गए हैं। जिन बच्चों ने असाइनमेंट जमा नहीं किया था, उनको भी न्यूनतम अंक देकर पास कर दिया गया है। इनमें से 4 लाख 46 हजार 393 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में पास हुए हैं। यह कुल परीक्षार्थियों को 97% है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here