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नेशनल पोकर सीरीज में कांस्य पदक जीतने के बाद, दुर्ग के आयुष की योजना इस खेल में प्रोफेशनल कॅरियर बनाने की है

दुर्ग (छत्तीसगढ़), पोकर में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रहने वाले 26 वर्षीय आयुष सोलंकी नेशनल पोकर सर्किट में अपनी धाक जमाने में सफल रहे हैं। सबसे प्रमुख टूर्नामेंट्स में से एक नेशनल पोकर सीरीज इंडिया के तीसरे संस्करण में कांस्य पदक जीतने के बाद उनकी योजना इस स्पोर्ट्स को फुल टाइम अपनाने की है। हालांकि, यह काफी चुनौतीपूर्ण अनुभव है। आयुष के बड़े भाई ने उन्हें इस खेल के दांवपेंच सिखाए थे। अब वह लगातार अपनी स्किल्स को निखार रहे हैं। नेशनल पोकर सीरीज में जीत हासिल करने के बाद आयुष ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के बाद मैं इस स्पोर्ट्स को अपने फुलटाइम करियर के रूप में अपनाना चाहता हूं। मेरे भाई कई वर्षों से पोकर खेल रहे हैं और उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को मेरे साथ साझा कर मेरे लिए गाइड की भूमिका भी निभाई है। वह मुझे कोचिंग के साथ मदद भी दे रहे हैं। मैंने अनुभव किया है कि अपनी स्किल्स को बढ़ाने और अपनी रणनीति को आक्रामक बनाने में उनका मार्गदर्शन और फीडबैक अविश्वसनीय रूप से काफी मददगार रहा।” हालांकि, वह पोकर को अपने फुल टाइम करियर को रूप में अपनाना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ ही वह यह भी समझते हैं, “दुनिया के कुछ देशों में जिस ढंग से पोकर खिलाड़ियों की प्रतिष्ठा है, भारत में अभी वह स्थिति नहीं है। उनका पोकर को करियर के रूप में अपनाने का फैसला बड़े पैमाने पर यहां लोगों को स्वीकार नहीं होगा। हालांकि उनका मानना है कि नेशनल पोकर सीरीज के रूप में यह प्लेटफॉर्म खेल के प्रति उत्साह और स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में इस क्षेत्र की कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। पोकर के पीछे का गणित समझने में गहरी दिलचस्पी के साथ इस खेल में आयुष का अब तक का सफर काफी चुनौतीपूर्ण और समृद्ध रहा है, जिससे उन्हें अपनी प्रोफेशनल लाइफ में इस अनुभव का लाभ उठाने और अपनी मजबूती और कमजोरियों का आकलन करने में काफी मदद मिली है। उन्होंने कहा, “पोकर में प्रमुख स्किल्स में एक इस खेल में छिपी संभावनाओं और चुनौतियों को समझना है। एक कुशल खिलाड़ी में पोकर के पीछे का गणित समझने में गहरी दिलचस्पी होगी और वह अपने उस ज्ञान के आधार पर सोच-समझकर फैसला करने में सक्षम होगा। यह उनकी शख्सियत को जानने और समझने का सफर हो सकता है क्योंकि इससे खिलाड़ी अपनी कमजोरियों और मजबूती के क्षेत्रों को जानेंगे और समय के साथ वह गेम को निखार सकेंगे।” उनका विश्वास है कि उनकी जीत उनके होमटाउन के कई लोगों को पोकर में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने पोकर के खेल में उभरते हुए खिलाड़ियों को धीरज रखने और इस क्षेत्र में पुरस्कार और उपलब्धि हासिल करने के लिए अनुशासित रहने की सलाह दी। उनका कहना है, “गेम को सीखिए। पहले छोटे से शुरुआत कीजिए, खेल पर अपनी मजबूत पकड़ बनाइए। अनुशासन के साथ खेलिए और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपना धीरज बनाए रखिए।” छत्तीसगढ़ के दुर्ग का यह …….. साल का लड़का इस प्रतियोगिता में अपनी शानदार उपलब्धि हासिल करने के लिए तैयार है। दिल्ली में होने वाली नेशनल पोकर सीरीज इंडिया की अवार्ड्स नाइट में 6 मई को उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा। कई सिलेब्रिटीज जैसे कॉमेडियन अनुभव सिंह बस्सी और संगीतकार रितविज भी इस पुरस्कार समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, “पोकर में मेरी भविष्य की योजना अपनी स्किल्स को विकसित करने ऑनलाइन तथा लाइव टूर्नामेंट्स के लिए रणनीति बनाने की है। मैं पोकर खिलाड़ी के रूप में सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं हमेशा खुद को चुनौती देने के लिए नए अवसरों की तलाश में रहता हूं और अपने खेल में और सुधार करना चाहता हूं।”