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रक्षा मंत्रालय ने पूर्व भारतीय कप्तान धोनी को दी बड़ी जिम्मेदारी, खास समिति में जगह

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सेना से लगाव जगजाहिर है। सेना ने उनको लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद उपाधि) बनाया है और इसके लिए वह अपनी सेवा भी दे चुके हैं। आगे भी वह देश में योगदान करने की इच्छा रखते हैं। सेना को दिल में बसाने वाले पूर्व कप्तान को अब युवाओं में देश की रक्षा और अनुशसन बनाए रखने के जज्बे को पैदा करने की खास जिम्मेदारी दी जाने की पहल की गई है।

जानकारी के मुताबिक युवाओं में सुरक्षा, रक्षा और अनुसाशन का पाठ पठाने वाले राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी एनसीसी को आने वाले वक्त में और भी प्रसांगिक बनाए जाने का फैसला लिया गया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई है। इसका उद्देश्य एनसीसी की व्यापक समीक्षा किया जाना है। जो समिति बनाई गई है इसमें पूर्व कप्तान धौनी को भी शामिल किया गया है। एएआई की रिपोर्ट के मुताबिक तीन सदस्यों की इस समिति में पूर्व कप्तान के अलावा एमपी विनय सहस्त्रबुद्धे और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को शामिल किया गया है।

एनसीसी कैडेट्स को दिए जाते हैं तीन सर्टिफिकेट

एनसीसी में शामिल होने वाले युवाओं को कैडेट बुलाया जाता है। तमाम कैडेट्स को उनकी योग्यता के अनुसार ए, बी और सी सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। कक्षा आठ से दस तक में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को ए सर्टिफिकेट के लिए चुना जाता है। दसवीं कक्षा से उपर यानी इंटरमीडिएट के छात्र होते हैं बी सर्टिफिकेट तो वहीं सी सर्टिफिकेट महाविद्यालय स्तर पर में पढ़ने वालों को दिया जाता है।

एनसीसी कोर्स करने पर मिलने वाले लाभ

जिन छात्रों के पास एनसीसी के प्रमाण-पत्र होते हैं उनको कुछ खास सुविधा का लाभ मिलात है। बी और सी सर्टिफिकेट के धारकों को अगली कक्षाओं में नाम लिखाने में इससे फायदा मिलता है। जिन 12वीं पास विद्यार्थी के पास बी सर्टिफिकेट होता है उनको स्नातक में दो प्रतिशत लाभ मिलता है। इसी तरह से जिस स्नातक के विद्यार्धी के पास सर्टिफिकेट होता है उसे स्नातकोत्तर में तीन प्रतिशत का महत्व मिलता है।

इतना ही नहीं सर्टिफिकेट पाने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई खत्म करने के बाद कई सरकारी विभागों की नौकरियों में भी भाग मिलता है। सी सर्टिफिकेट पाने वाले विद्यार्थियों को सेना और पुलिस सिपाही भर्ती में कोई लिखित परीक्षा नहीं देनी होती। इतना ही नहीं उनको आईएमए (इंडियन मिलिट्री एकेडमी) में सीटें आरक्षित होती हैं।

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