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होली भाईदूज की कथा: बहनें लगाती हैं भाई को टीका, बेहतर जीवन की करती हैं कामना

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होली भाईदूज में बहन भाई के माथे पर सौभाग्य का तिलक लगाकर उसके निष्कंटक जीवन की कामना करती है। यह भाई बहन के आपसी प्रेम का त्यौहार है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक वृद्धा रहा करती थी। उसके दो संतान थी, एक पुत्र और एक पुत्री। वृद्धा की पुत्री की शादी हो चुकी थी।

एक बार होली के बाद भाई ने अपनी मां से अपनी बहन के यहां जाकर तिलक कराए जाने की बात कही। वृद्धा ने अपने बेटे को जाने की इजाजत दे दी। लड़का बहन के घर जाने के लिए निकला। उसे रास्ते में नदी मिली। नदी ने उससे कहा, मैं तेरा काल हूं और मैं तेरी जान लूंगी। तब लड़का बोला, पहले मैं अपनी बहन से तिलक करा लूं फिर मेरे प्राण हर लेना।

इसके बाद वह आगे बढ़ा, जहां उसे एक शेर मिला। वृद्धा के बेटे ने शेर से भी यही कहा। इसके बाद उसे एक सांप मिला, उसने सांप से भी यही कहा। जिसके बाद वह अपनी बहन के घर पहुंचा। उस समय उसकी बहन सूत कात रही थी। लड़का जब तिलक करा रहा था तो वह दु:खी था। बहन ने इसका कारण पूछा। उसने बहन से अपने दु:ख का कारण बता दिया।

लड़के की बहन ने भाई को रुकने का कहा और खुद पास के तालाब गई। जहां एक वृद्धा थी। उससे उसने भाई की समस्या का समाधान पूछा। वृद्धा ने बताया कि यह तेरे ही पिछले जन्मों का कर्म है, जो तेरे भाई को भुगतना पड़ रहा है। अगर तू अपने भाई को बचाना चाहती है तो उसकी शादी होने तक उसकी सहायता करोगी, तो तुम्हारा भाई बच सकता है।

बहन ने कहा कि भाई रुक मैं तुझे छोडऩे घर चलूंगी। बहन ने अपने साथ मांस, दूध और ओढऩी साथ रख ली। दोनों आगे रास्ते पर वापस चले उन्हें पहले शेर मिला। बहन ने शेर के आगे मांस डाल दिया। वह खाने में मस्त हो गया। उसके बाद वे आगे बढ़े उन्हें रास्ते में सांप मिला। बहन ने सांप के आगे दूध रख दिया। सांप भी दूध पीकर खुश हो गया।

रास्ते में अंत में नदी मिली। बहन ने पूरी श्रद्धा से नदी को चुनरी उढ़ाकर नमन किया। नदी भी बहन के इस व्यवहार से खुश हो गई। इस तरह बहन ने भाई की जान बचा ली। कहा जाता है कि होली भाईदूज के दिन बहन से तिलक करवाने पर भाई की जीवन निष्कंटक (बिना बाधा के) होता है।

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