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साल का पहला सूर्यग्रहण होगा अद्भूत, 100 वर्षों बाद दिखेगा ये खास नजारा

20 अप्रैल को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इस सूर्यग्रहण की खास बात यह है कि यह एक दुर्लभ हाइब्रिड सूर्य ग्रहण होगा जो हिंद और प्रशांत महासागर के कुछ इलाकों में दिखेगा। अब आपका प्रश्न होगा कि ये दुर्लभ हाइब्रिच सूर्यग्रहण क्या होता है, ये भारत मे भी दिखेगा। यदि दिखेगा तो कब दिखेगा तो आइए ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब हम आपको देने जा रहे हैं।
सूर्य ग्रहण क्या होता है

सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनो एक सीधी रेखा के रुप में आ जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इससे पृथ्वी पर एक पूरी तरह सूर्य के प्रकाश नहीं आ पाता।
हाइब्रिड सूर्य ग्रहण
हाइब्रिड सूर्य ग्रहण, सूर्यग्रहण से थोड़ा अलग होता है। क्यों कि पृथ्वी की सतह घुमावदार है। कभी-कभी एक ग्रहण पड़ता तो है लेकिन वह वलयाकार और पूर्ण ग्रहण के बीच शिफ्ट हो सकता है। अब ये इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की छाया दुनियाभर से गुजरती है। आसान भाषा में समझें तो यह आंशिक, पूर्ण और वलयाकार सूर्य ग्रहण का मिश्रण होता है, जो महज कुछ सेकंड के लिए नजर आता है।

हाइब्रिड सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को लगेगा। भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण सुबह 07:06 बजे से 12:29 बजे तक प्रभावी होगा। हालांकि भारत में यह नहीं दिखाई देगा। यह ग्रहण पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी तिमोर और पूर्वी इंडोनेशिया से दिखाई देगा। भारत के अलावा अमेरिका से भी इस ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा। इन इलाकों में कुछ लोगों को पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जबकि कई लोगों को ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी वलयाकार ग्रहण दिखाई देगा। कई लोग आशिंक सूर्य ग्रहण देख पाएंगे। यह एक खगोलीय घटना है जो 100 साल में एक बार घटित होती है।

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