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पुलिस ने दूर की भाषा की अड़चन, श्रद्धालुओं की मदद कर रहे दुभाषिये

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हरिद्वार। कुंभ में सिर्फ धर्म और अध्यात्म ही नहीं, देश की अलग-अलग भाषाओं का संगम भी देखने को मिल रहा है। गैर हिंदी भाषी राज्यों से कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला पुलिस ने अनूठी पहल की है। परिवार से बिछुड़ों को मिलाने के लिए या कोई अन्य समस्या होने पर उनकी भाषा समझना जरूरी है। इस कार्य में मेले में तैनात अर्धसैनिक बल के 65 जवान सुरक्षा के साथ-साथ दुभाषिये की भूमिका निभा रहे हैं।

कुंभ में गंगा स्नान का पुण्य कमाने और धर्म व अध्यात्म को करीब से जानने के लिए देश दुनिया से लोग पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश राष्ट्रभाषा हिंदी बोलते हैं। मगर तमिल, कन्नड़, उड़िया, मराठी, असमी, गुजराती जैसी भाषाएं बोलने वाले श्रद्धालु भी कुंभ में पहुंचे हैं। भीड़ में किसी हिंदी भाषी परिवार का सदस्य बिछुड़ जाए तो उसे ढूंढना पुलिस के लिए आसान हो जाता है। अलबत्ता, गैर हिंदी भाषी श्रद्धालुओं की मदद के लिए उनकी भाषा समझने में दिक्कत आती है। इस व्यवहारिक कठिनाई को पहचानते हुए कुंभ मेला आइजी संजय गुंज्याल ने अनूठी तरकीब निकाली।

दरअसल, कुंभ मेले में सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बल की करीब 40 कंपनियां तैनात हैं। इनमें अलग-अलग भाषाओं को जानने वाले हर राज्य के जवान हैं। मेला आइजी के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक दूर संचार रेवाधर मठपाल ने सीआरपीएफ, सीआइएसएफ, एसएसबी जैसे बलों से कुल 65 जवानों का चयन दुभाषिये के तौर पर किया और उनको बकायदा प्रशिक्षण दिया गया कि किस प्रकार उन्हें गैर हिंदी भाषी श्रद्धालुओं और मेला पुलिस के बीच अहम कड़ी बनना है।

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