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हरिद्वार कुंभ मेला 2021: आस्था और उत्साह के साथ निकली बैरागी अखाड़ों की पेशवाई

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हरिद्वार। अखिल भारतीय श्री पंच वैष्णव बैरागी तीनों अनी अखाड़ों की पेशवाई आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। भूपतवाला से धूम धड़ाके और गाजे-बाजे के साथ पेशवाई शुरू होकर बैरागी कैंप पहुंचकर संपन्न हुई। शस्त्रों से युद्ध कौशल के करतब कर साधु-संतों ने सभी को दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर दिया। पूरे रास्ते पेशवाई पर हैलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए, जबकि लोगों ने भी जगह-जगह पेशवाई में शामिल संतों का अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। पेशवाई को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। पेशवाई में देशभर के बैरागी संतों के 1100 खालसे शामिल हुए।

मंगलवार को भूपतवाला स्थित माता वैष्णो देवी शक्तिपीठ आश्रम से श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, श्री पंच दिगंबर अनी अखाड़ा, श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा की पेशवाई पूजा-अर्चना के साथ सभी परंपराओं का निर्वहन करते हुए विधि-विधान से शुरू की गई। पेशवाई में सबसे आगे हाथी और उसके पीछे घोड़ों पर संत सवार थे, जबकि इसके पीछे ऊंट पर लंबी जटाओ वाले साधु चल रहे थे।

पीछे कुंभ क्लश और मां गंगा की झांकी और फिर शस्त्रों के साथ साधुओं के जत्थे के बीच श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास, श्री पंच दिगंबर अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत रामकृष्णदास, श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास, बाबा हठयोगी के साथ अन्य संत पैदल चल रहे थे। इनके आगे तलवार और अन्य शस्त्रों से साधु युद्ध कौशल के प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। कई किलोमीटर लंबी पेशवाई पर पूरे रास्ते हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा होती रही। बैरागी कैंप क्षेत्र स्थित अखाड़ा की छावनियों में पहुंचकर पेशवाई समाप्त हुई।

पेशवाई मार्ग पर किया सेनेटाइजेशन

भूपतवाला से लेकर बैरागी कैंप तक पूरे पेशवाई मार्ग को सेनेटाइजेशन किया गया। पेशवाई के सबसे आगे बीएचईएल की ओर से बनाई गई सेनेटाइज मशीन सेनेटाइजेशन करती चल रही थी।

लंबी जटाओ वाले संत की लाइव बात

ऊंट पर सवार लंबी जटाओ वाले संत को देख लोग अभिभूपत हो गए। ऊंट पर बैठे संत अपने भक्तों को वीडियो कॉल कर लाइव बातचीत करते दिखे, जबकि लोग इन्हें अपने कैमरों में कैद करने को मजबूर हो गए।

शंख और घंटी बजाकर दिया पेशवाई आने का संदेश

पेशवाई से काफी आगे एक साधु शंख और घंटी बजाते हुए चल रहे थे। वह शंख और घंटी बजाकर पेशवाई के प्रस्थान करने का संदेश देते चल रहे थे।

छड़ी लेकर चल रहे संत बने आकर्षण का केंद्र

पेशवाई में काफी संख्या में संत दोनों किनारे अखाड़ों की पवित्र छड़ी हाथों में लेकर चल रहे थे। पैदल चल रहे इन संतों ने पेशवाई की शान को बढ़ाया।

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