Home धर्म रक्षाबंधन पर भद्रा का साया, जानिए भद्राकाल में क्यों नहीं बांधते राखी

रक्षाबंधन पर भद्रा का साया, जानिए भद्राकाल में क्यों नहीं बांधते राखी

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सावन में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है। सावन मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाते हैं। कई ग्रहों के प्रभाव से भाई-बहन के प्यार वाले त्योहार पर बुरी नजर पड़ती है, जिनमें से एक भद्रा भी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भद्रा काल को अशुभ मुहूर्त में गिना जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों की मनाही होती है।

इस साल भद्रा का साया-

मध्यान्ह में वृश्चिक लग्न में दोपहर 12.00 बजे से 2.12 बजे तक और कुंभ लग्न में सायंकाल 6.06 बजे से 7.40 बजे तक का रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त है। 22 तारीख को प्रात: 6.16 बजे तक भद्रा की उपस्थिति है। इस कारण प्रात: 6.16 बजे तक रक्षा सूत्र नहीं बांध सकेंगे। शाम को 04 बजकर 30 मिनट से राहुकाल आरंभ होने से पहले रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा सकेगा। शास्त्रों में भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। इस साल रक्षाबंधन पर चंद्रमा मंगल के नक्षत्र और कुंभ राशि पर संचार करेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 22 अगस्त 2022, दिन रविवार को है।

भद्राकाल में नहीं बांधे राखी-

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ होता है। दरअसल शास्त्रों में राहुकाल और भद्रा के समय शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार भद्रा में राखी न बंधवाने की पीछ कारण है कि लंकापति रावण ने अपनी बहन से भद्रा में राखी बंधवाई और एक साल के अंदर उसका विनाश हो गया। इसलिए इस समय को छोड़कर ही बहनें अपने भाई के राखी बांधती हैं। वहीं यह भी कहा जाता है कि भद्रा शनि महाराज की बहन है। उन्हें ब्रह्माजी जी ने शाप दिया था कि जो भी व्यक्ति भद्रा में शुभ काम करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा। इसके अलावा राहुकाल में भी राखी नहीं बांधी जाती है।

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